Domestic violence during lockdown
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घरेलू हिंसा: निदान

द्वारा Akshita Nagpal मई 29, 09:58 पूर्वान्ह
भारत में घरेलू हिंसा कानूनी तौर पर अपराध है, फिर भी 15 से 49 साल की उम्र के बीच की हर तीसरी स्त्री अपने घर पर ही हिंसा का शिकार होती है। COVID-19 ke लॉकडाउन के दौरान भी घरेलू हिंसा के मामलों में बहुत तेज़ी आयी है। यह हिंसा शारीरिक, यौनिक, मानसिक और आर्थिक – किसी भी तरह की हो सकती है। अगर आप इससे जूझ रहे हैं तो इस चक्र को तोड़ने के लिए क्या करेंगे? हम आपके लिए कुछ टिप्स और सलाह लेकर आये हैं।

हिंसा को पहचानिये 

आप हिंसा से जूझ रहे हैं अथवा नहीं, इस बात की पहचान करने के कई मापदंड अथवा चिह्न होते हैं – साथी के द्वारा आपके काम-काज या  व्यवहार को नियंत्रित (कंट्रोल) किया जाना, आपको अथवा अपने-आप को नुकसान पहुंचाने की धमकी देना, ज़बरदस्ती सेक्स करना, खाना अथवा अन्य ज़रूरत की चीज़ें देने से मना करना, आपके पैसों पर उनका नियंत्रण होना, इत्यादि ।।। लेकिन इसके अलावा भी घरेलू हिंसा के कई चिह्न हो सकते  हैं ।

यह कभी मत सोचिये कि ‘कुछ ग़लत नहीं हुआ है’ या फिर ‘ यह तो हर किसी के साथ होता है’।।। सबसे बुरे हालत तो तब होते हैं जब पीड़ित यह सोचते हैं कि हिंसा करने वाला/वाली व्यक्ति आख़िर प्यार मुझसे करता/ करती है। किसी भी तरह के हिंसक व्यवहार को आम तौर पर होने वाली घटना मानकर स्वीकार मत कीजिये।

आपका कसूर नहीं 

 सबसे पहली बात यह कि अपने आप को दोष मत दीजिये, यह आपकी ग़लती नहीं है। अपने आप को कभी उस बात के लिए ग़लत मत मानिए जो आपके साथ हो रहा है। दुनिया में कोई भी ऐसा रिश्ता नहीं है जो हिंसा को जस्टिफाय करे या फिर उसके पक्ष में दलीलें दे।

अक्सर शोषक पीड़ित पर ही आरोप लगा देते हैं कि उनकी वजह से तनाव हो रहा है (जैसे मैं तुम्हारी वजह से सफल नहीं हो पाया), या फिर रिश्ते में  धोखा देने की बात करना। कई बार शोषक पीड़ित पर किसी भी काम या ज़िम्मेदारी को निभाने के लायक नहीं होने का आरोप भी लगाते हैं।  फिर से, कुछ भी हिंसा को जस्टिफाय नहीं करता है।

अपने आप में आपको यह मानना पड़ेगा कि आप किसी भी तरह से हिंसा नहीं भड़का रहे हैं। इस बात को मानना इसलिए  बहुत ज़रूरी है कि हिंसा के चक्र को पूरी तरह तोड़ा जा सके।

बात कीजिए, साझा कीजिए

 अपने आप को अकेलेपन में बंद मत कीजिये। यह आपके शोषक के पक्ष में जाता है। उन्हें इस बात से उत्साह मिलता है कि आप एकदम अकेले हो चुके हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप अपनी बातों को न छुपाएँ, इसे किसी न किसी के साथ साझा करें, अपनी बातों को बताएँ। शायद आपको किसी की ज़रूरत हो जो इस कठिन समय में आपकी बात सुन सके या फिर इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता बता सके। हो सकता है कि इस बात के ज़रिये आपको हिंसा से बाहर निकलने का कोई रास्ता मिल जाए।

किसी उस व्यक्ति के बारे में सोचिये जो आपकी मदद कर सकता है। हो सकता है वह कोई आपके परिवार का ही सदस्य हो या फिर दोस्त। अगर आपके परिवार के लोग आपकी बात समझने में असमर्थ हैं या फिर दूर हैं तो आप अपने आस-पास के भी किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मदद ले सकते हैं।

 किसी भी तरह की कानूनी सहायता अथवा किसी काउंसेलर की मदद लेने से न हिचकें।  बात न करने की हालत में घरेलू हिंसा आपके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात करती है और डिप्रेशन, तनाव, ड्रग एडिक्शन जैसे  खतरनाक परिस्थितियों की ओर भी मोड़ती है। हो सकता है कोई काउंसेलर आपकी बातों को समझे, आपकी अंदरूनी क्षमता को उभारने में मदद करे, उत्साह जगाये और इस मुश्किल हालात से निबटने में आपकी मदद करे।

बाहर का रास्ता

अगर आपको तनिक भी आभास होता है कि आपके ऊपर किसी भी तरह का ख़तरा नही तो आपको जल्द से जल्द उस जगह से बाहर निकल जाना चाहिए जहाँ आपके साथ हिंसा हो सकती है। इसके लिए ज़रूरी है कि आप कुछ चीज़ों का ध्यान रखें। अपना ज़रूरी सामान अपने साथ लें। उस जगह के बारे में पक्के से सोच लें जहाँ आप जाने वाले हैं, जहाँ आप रह सकते हैं और बाहर निकलने के बाद आप ज़िन्दगी चलाने के लिए पैसों का इंतजाम कैसे करेंगे , यह सब पहले से तय कर लेना ज़रूरी है।

किसी भरोसेमंद पड़ोसी या शख्स से घर छोड़ते वक़्त या आगे मदद की उम्मीद की जा सकती है। हालाँकि बहुत कुछ इस पर भी निर्भर करता है कि परिस्थितियां आगे क्या होंगी। जैसे आर्थिक हालात – ख़ासतौर पर तब जब साथ बच्चे हों। एक सोच समझा प्लान किसी  भी आपात स्थिति में निबटने के लिए तैयार करता  है।

पढिये और जानकारी लीजिये

घरेलू हिंसा के विषय में अखबार में, इंटरनेट पर पढ़ते रहें। हम जानते हैं कि इन जानकारियों को इकट्ठा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है पर यह आपको आपकी तात्कालिक अवस्था से निकलने में ख़ूब मदद कर सकता है।

इमरजेंसी/ आपात सहायता नम्बर और उससे जुड़ी बाकी ज़रूरी जानकारियों  को दर्ज करके रखें, यह आपको आपके राज्य/ शहर में मदद पाने के सहायता कर सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली में हैं तो आप पास के मिल्क बूथ (मदर डेरी बूथ) अथवा दवाई की दुकानों पर इसके बारे में बता सकते हैं। आप विधिक सेवा एप भी डाउनलोड भी कर सकते हैं। अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में हैं तो आँगनवाड़ी और आशा वर्कर की भी मदद ले सकते हैं। यह जानकारी बार-बार अखबारों  और सम्बंधित वेबसाईट में भी छपती है।

सहायता के लिए उपलब्ध फॉर्म में दी गयी जानकारियों को कहीं लिख लें। उन कानूनों के बारे में पढ़ें जो घरेलू हिंसा के खिलाफ़ इस्तेमाल की जाती हैं। यह आपको समझने में मदद करेगा कि आपको किन-किन सबूतों को इकट्ठा करना है या फिर आपकी हालत में किन लोगों से मदद मांगनी है।

आर्थिक स्वतंत्रता : अपने आप को हिंसा से कैसे बचाएं, इस बारे में सोचते हुए यह सोचना भी ज़रूरी है कि आप अपनी आर्थिक स्वतंत्रता के विषय में भी विचार लें। अगर आप कामकाजी नहीं हैं तो किसी नौकरी के लिए आवेदन पत्र भरें। आपको अपने शोषक पर किसी भी प्रकार की आर्थिक ज़रूरतों के लिए निर्भर नहीं होना चाहिए। अगर आप नौकरी में हैं तो जितना हो सके बचत करने की कोशिश करें।  अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा किसी अलग अकाउंट का फिक्स्ड डिपाजिट के रूप में बचाना भी एक तरीका हो सकता है। कोशिश करें कि आपके पास स्वतंत्र बैंक अकाउंट है।

 केवल बच्चों की ख़ुशी की ख़ातिर न झेलें

 कई महिलायें सोचती हैं कि उन्हें बच्चों की ख़ुशी की ख़ातिर अपने शोषक/ हिंसक  साथी के साथ ज़िन्दगी बितानी पड़ेगी और वे इस व्यवहार को झेलती रहती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके बच्चों के हक़ में यही सही है। वे गालियाँ सुनती हैं, मार खाती हैं और केवल इसलिए कि उन्हें लगता है कि वे इस तरह अपने परिवार को जोड़े रख रही हैं।

जबकि इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। इस हालत में परिवार भले ही एक घर में रह रहा हो पर यह उस घर में रहने वाले बच्चे जो लगातार माँ-बाप की लड़ाई और हिंसा देख रहे हैं  के साथ-साथ माँ की मानसिक हालत के लिए भी दुरुस्त नहीं है। एक ख़ुश व्यक्ति अधिक ज़िम्मेदार माँ-बाप की भूमिका निभा सकता है।

आपात स्थिति में क्या करें

पुलिस से संपर्क करें: आप 100 के नम्बर पर कॉल करके तुरंत मदद की गुहार लगा सकती हैं। 1091 और 1291 जैसे टोल फ्री नम्बर ख़ासतौर पर महिलाओं की मदद के लिए बनाये गए हैं। 181 घरेलू हिंसा के मामले में मदद पाने के लिए ज़रूरी हेल्पलाइन नम्बर है।

स्वयंसेवी संस्था:कई स्वयंसेवी संस्था भी हेल्पलाइन चला रहे हैं, आप उनके हेल्पलाइन पर फ़ोन करके भी मदद मांग सकते हैं या फिर व्हाट्सएप भी कर सकते हैं

सोशल मीडिया: आपका सोशल मीडिया हैंडल भी आपकी मदद कर सकता है। आप अपने फ़ेसबुक, इन्स्टाग्राम, या ट्विटर पर भी एक आपात संदेश (SOS message) पोस्ट कर सकते हैं।

अपने परिवार के लोगों, दोस्तों या फिर किसी NGO/ महिला हेल्पलाइन नम्बर को भी टैग कर सकते हैं।  अगर आप अपना फ़ोन नम्बर नहीं शेयर करना चाहते हैं, अपने पोस्ट के साथ अपना लोकेशन या फोर लैंडलाइन नम्बर दर्ज कर दें। इससे मददगार लोगों को आप तक पहुँचने में सहुलिय होगी।

डॉक्टरी सहायता लें: किसी डॉक्टर के पास जाना भी आपकी मदद का रास्ता हो सकता है। ज़रूरी चिकित्सकीय मदद के अतिरिक्त डॉक्टर्स को घरेलू हिंसा के पीड़ित लोगों को आवश्यक मानसिक और क़ानूनी मदद देने के लिए भी ट्रेंड किया जाता है। वे आपको पुलिस अथवा अन्य उपयुक्त व्यक्ति/ संस्था जो आपको आगे मदद कर सकते हैं उनसे सम्पर्क करवा सकते हैं।

शारीरिक हिंसा के मामले में डॉक्टर ज़रूरी चिकित्सकीय सलाह के साथ विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट भी तैयार करते हैं, जिससे कानूनी मामलों में भी बहुत मदद मिलती है। अगर संभव हो तो शारीरिक हिंसा से मिले घाव की तस्वीर खींच कर सुरक्षित रख लें।

आश्रय स्थल: अगर आपको किसी सुरक्षित जगह की ज़रूरत हो तो सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं ने  आश्रय स्थल बना रखे हैं। इनमें से कुछ को नारी-निकेतन कहा जाता है।18 से कम उम्र वाली लड़कियों के लिए महिला और परिवार कल्याण मंत्रालय  वन-स्टॉप सेंटर (OSCs) चलाता है, वहां घरेलू हिंसा अथवा किसी प्रकार की लैंगिक हिंसा की शिकार लड़कियों को ज़रूरी खाना, कपडा, कानूनी, डॉक्टरी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी मदद मुहैया करवाई जाती है।

अगर आपके पास थोड़े भी पैसे बचत के तौर पर मौजूद हैं तो घर से बाहर निकालिए, अपने लिए सुरक्षित ठिकाना ढूँढ़िये।

क्या आप घर पर किसी तरह की हिंसा या दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं? नीचे टिप्पणी करें या हमारे चर्चा मंच पर एलएम विशेषज्ञों से पूछें। हमारा फेसबुक पेज चेक करना ना भूलें।

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