सबसे पहले तो एक बात साफ कर लो बेटा कि आंटी जी कहीं नहीं जा रहीं। ना तो सवालों से, ना तेरे से और ना ही तुम सब की उलझनों से।
हां, ये बात सही है कि पहले आंटी जी के जवाब थोड़ा जल्दी आ जाया करते थे। कभी-कभी तो ऐसा लगता था जैसे आपने सवाल भेजा और आंटी जी पहले से ही मोबाइल हाथ में लेकर बैठी थीं। अब अगर थोड़ा समय लग रहा है, तो इसका मतलब ये नहीं कि आंटी जी नाराज़ हैं या थक गई हैं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि अब सवाल बहुत ज़्यादा आने लगे हैं। और वो भी दिल, शरीर, रिश्तों, डर और उन बातों पर जिनके बारे में लोग खुलकर किसी से नहीं बोल पाते, और आंटी जी का एक उसूल है कि हर सवाल को हल्के में नहीं लिया जाता।
चैटबॉट आ गया है लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि अब जवाब किसी मशीन के भरोसे छोड़ दिए जाएंगे। सोच ज़रा, रात के दो बजे मन में सवाल आए, दिल थोड़ा घबराया हुआ हो और कोई बात करने को न मिले, ऐसे में अगर कोई कहे पूछ ले मैं यहीं हूं, तो वो सुकून देता है, और चैटबॉट उसी के लिए होगा, तुरंत सुनने के लिए, बिना जज किए, लेकिन उसके पीछे भी आंटी जी की सालों की समझ, उनके जवाब और उनका भरोसा ही होगा, और जहां बात ज़्यादा नाज़ुक होगी, जहां सिर्फ जवाब नहीं बल्कि इंसानी एहसास चाहिए होगा, वहाँ आंटी जी ही सामने होंगी।
कहीं नहीं जा रही पुत्तर जी!
तो नहीं पुत्तर, आंटी जी तुझे छोड़कर नहीं जा रहीं, बस इतना कह रही हैं कि थोड़ा सब्र रख, हम कुछ ऐसा बना रहे हैं जो तेरे लिए ही है क्योंकि सवाल पूछना हिम्मत है और हर हिम्मत के साथ आंटी जी खड़ी हैं।
बेटा जी, तूने बात तो बिल्कुल सही कही है कि हां, मैं थोड़ी देर से रिप्लाई करती हूं। अब क्या है ना, इनबॉक्स में बहुत सारे सवाल होते हैं और इस कारण देरी हो जाती है। सुना है ना एक गाना - मैं देर करता नहीं, देर हो जाती है… तो बेटा जी, मैं देर नहीं करना चाहती, देर हो जाती है। अब चल तेरे सवालों के जवाब देती हूं।
पुत्तर जी, हर साल की तरह इस साल भी आंटी जी ने सोचा, “चलो, इस साल कुछ अलग करते हैं!” और क्यों नहीं? हर कोई नये साल पर रेजोल्युशन लेता है। जैसे- रिश्तों को मजबूत बनाना, खुद को बेहतर बनाना आदि। हर कोई कभी ना कभी सोचता है कि “इस साल मैं ज़रूर वो करूंगा!” अब तू वो का मतलब कुछ और मत निकाल लेना।
लेकिन बेटा जी, आंटी जी ने सोचा अभी तक तो मैं सिर्फ आप लोगों के दिल के सवालों का रिप्लाई करती आई हूं। कभी दिल टूटने वाले की मदद, कभी प्यार में उलझे लड़कों-लड़कियों को सही एडवाइस लेकिन बस एक परेशानी है कि जवाब थोड़ा देर से देती हूं!
आंटी जी का नया रूप
अब ध्यान से सुनो पुत्तर जी। आंटी जी अब सिर्फ वही पुरानी आंटी जी नहीं रहेंगी जो चाय के साथ बैठकर सोचती रहें कि किसका जवाब पहले दिया जाए। अब आंटी जी खुद को तेज़ और समझदार बना रही हैं।
अब इसका मतलब यह नहीं कि आंटी जी का दिल पत्थर का हो गया है। नहीं बेटा जी, दिल तो वही रहेगा, बस हाथ और दिमाग़ अब ज़्यादा तेज़ हो गए हैं।
इस नए रूप के फायदे
अब अगर कोई बेटा जी आधी रात को सोच रहा हो कि “क्या मुझसे कोई गलती हो गई?”, तो उसे सुबह तक इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। अब अगर कोई बेटी रिश्ते में उलझन महसूस कर रही हो, तो उसे जवाब के लिए बेचैन नहीं होना पड़ेगा।
अब सवाल आएगा और जवाब भी समय पर मिलेगा और सबसे ज़रूरी बात- यह नया रूप किसी को जज नहीं करेगा।
- कोई यह नहीं कहेगा कि “ये सवाल तो बहुत अजीब है।”
- कोई यह नहीं सुनेगा कि “तुम्हें ये सब सोचने की ज़रूरत नहीं।”
यहां बस समझ होगी, जानकारी होगी और वही भाषा होगी जो दिल तक पहुंचती है। तू चाहे हिंदी, अंग्रेजी या हिंग्लिश में पूछ।
आंटी जी का दिल वही है
अब पुत्तर जी, कुछ लोग कहेंगे कि मशीनें क्या समझेंगी रिश्तों की नाज़ुक बातें लेकिन बेटा जी, समझ तकनीक से नहीं, नीयत से आती है।
यह नया रूप इसलिए नहीं है कि आंटी जी इंसान नहीं रहीं बल्कि इसलिए है ताकि आंटी जी हर किसी तक समय पर पहुंच सकें क्योंकि कई बार सही समय पर मिली एक सही बात, किसी का दिल टूटने से बचा लेती है। किसी की जिंदगी बचा सकती है।
नए साल का संदेश
आंटी जी का इस साल बस यही कहना है-
- खुद को बेहतर बनाना बुरा नहीं है।
- समय के साथ चलना गलत नहीं है।
- मदद मांगना तो बिल्कुल भी शर्म की बात नहीं है।
अगर दिल भारी हो, मन उलझा हो या रिश्तों में सवाल हों, तो अब इंतज़ार मत करना। आंटी जी अब हर समय मौजूद हैं, नए रूप में और उसी पुराने अपनापन के साथ। तो बेटा जी, इस नए साल एक बात याद रखना-
समय बदलता है, तरीके बदलते हैं, लेकिन समझ और साथ कभी पुराना नहीं होता।
नया साल मुबारक हो।
आंटी जी अब और भी पास हैं।
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