pride parade
Shutterstock/Aamir M Khan

जब पापा भी प्राइड परेड के लिए साथ आये!

द्वारा Lavanya Rana जुलाई 20, 09:27 बजे
लावण्या अपने पहले प्राइड परेड की सुनहरी यादें साझा कर रही है, जिसे उसके माता-पिता के मिले सहयोग ने और भी ख़ास बना दिया था।

लावण्या एक 19 वर्षीय नारीवादी है जो मज़बूती से ऐसी जगह बनाने में विश्वास करती हैं जहाँ महिलाएं बिना छेड़छाड़ या अपने फैसले बिना डर के स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त कर सकती हैं।

आम तौर पर, मई की भरी दोपहरी में ऐसी बहुत कम संभावनाये ही होंगी है की कोई किसी बात पर ख़ुश हो। लेकिन 17 मई को, अगर मैं कोशिश करती तो भी मैं नाखुश नहीं हो सकती थी! आप पूछ सकते हैं की क्यों?

देखिये यह हर रोज़ नहीं होता की एक देसी क्वीर लड़की को उसके माता-पिता प्राइड परेड में खुद छोड़ कर आयें! पिछले साल न केवल यह मेरा पहला प्राइड परेड था बल्कि भोपाल का भी पहला प्राइड परेड था! यह मेरे और मेरे साथी एलजीबीटी ++ लोगों के लिए एक बहुत जरूरी संकेत था कि इतने कलंक और पूर्वाग्रह के बावजूद, हमारा शहर और हमारा देश बदल रहा है। भले ही धीरे-धीरे, और अगर यह खुश होने की बात नहीं है, तो पता नहीं इसके अलावा और क्या है।

तो चलिये मैं बताती हूँ की हुआ क्या। मैं अपने जीवन के सबसे एहम दिन के लिए तैयार होने के लिए जल्दी उठ गई! मैं बहुत ही ज्यादा उत्सुक थी और मेरे लिए यह सबसे ज्यादा विशेष इसलिये भी था क्यूंकि मेरी माँ और पिताजी ने मुझे इस इस परेड में छोड़ने का वादा किया था। मेरा प्राइड घर से ही शुरू हो गया क्योंकि मेरे दिल ने मेरे माता-पिता के लिए गर्व महसूस किया! ना सिर्फ़ यह चमकीला और गर्म दिन था। बहुत ही सुन्दर और अनोखे कपड़ों पहने हुये सभी लोग प्राइड की तरफ़ चल रहे थे। हवाओं में हंसी, चहचहाकट और कैमरे के शटर की आवाज़ें गूँज रही थीं। लेकिन जिस बात ने मेरे दिल को सबसे ज्यादा छुआ वो था वहाँ मौजूद लोगों में एकता के भाव का होना।  उस दिन मैंने यह सीखा कि कैसे अजनबी भी परिवार बन जाते हैं। मैंने उस दिन एक नया दोस्त भी बनाया- उसका नाम था आस्था।

जैसे-जैसे चीजें रोमांचित होनी शुरू हुईं, मैंने उत्साहपूर्वक मिनी प्राइड झंडे को लोगों की तरफ़ आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी ली। और फिर प्राइड मार्च शुरू हुआ। लोग धारा 377 की निंदा करते हुए ज़ोर-जोर से नारे लगा रहे थे, प्यार करने का अधिकार व्यक्त करते हुए, बार-बार इस बात पर ज़ोर दे रहे थे की सभी प्यार एक समान हैं”I

आस्था और मैं मेले में उत्साहित बच्चों की जोड़ी की तरह भीड़ के साथ थे, हम उस जगह, उन सभी आवाज़ों और हमारे आसपास होने वाली हर बात का आनंद ले रहे थे।उस दिन, कुछ घंटों पहले ही जो अजनबी थे उनके द्वारा पार्टियों का आमंत्रण, गले लगना और तस्वीरे लेने के बाद मुझे कुछ एहसास हुआ। मुझे एहसास हुआ कि हम स्वीकृति, प्यार और संबंधों के लिए कितने भूखे हैं।

उस दिन का सबसे यादगार पल वो था जब हम एक विशाल प्राइड झंडे के नीचे चल रहे थेI मैंने उस दिन इतना स्वछंद और खुश महसूस किया था कि मैं तो अभी से अगली अगले साल की प्राइड परेड का इंतज़ार कर रही हूँ!

* गोपनीयता बनाये रखने के लिए कुछ नाम बदल दिए गए हैं और तस्वीर के लिए मॉडल का इस्तेमाल किया गया हैI

क्या आपने LGBT Pride Parade and Festival या दिल्ली प्राइड परेड में भाग लिया है?  pride parade, gay parade का आपका अनुभव क्या है?

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