Myths about homosexuality
Shutterstock/Saikat Paul

समलैंगिकता से जुड़े 10 मिथ्य

समलैंगिकता एक विकल्प या चुनाव है।

इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है की आप समलैंगिक या विषमलैंगिक होने के बीच चुनाव कर सकते हैं। समलैंगिकता इस बारे में है की आप अंदर से कैसा महसूस करते हैं, जो जन्म से भी निर्धारित हो सकता है।

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समलैंगिकता अप्राकृतिक है - यह एक रोग या मानसिक बीमारी है।

समलैंगिकता मानव यौनिकता का एक प्राकृतिक हिस्सा है। यह विचार की गे एवं लेस्बियन लोगों के साथ कुछ गड़बड़ या गलत है, संस्कृति, परम्परा एवं धर्म पर आधारित है। चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक नज़रिए से, समलैंगिक होना पूरी तरह सामान्य है।
समलैंगिकता प्रकृति का हिस्सा है, और केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि बहुत सारे जानवरों की प्रजातियों जिनमें कीट, मछलियाँ एवं स्तनधारी जीव शामिल हैं - हाथियों, डाल्फि़न, भालुओं, भैसों में भी समलैंगिक रिश्ते पाए गए हैं।

समलैंगिकता का इलाज संभव है।

समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं है अतः इसका ’इलाज‘ नहीं हो सकता है। इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है की कोई भी चीज़ आपको समलैंगिक से विषमलैंगिक होने में बदल सकती है। आप बस ऐसे ही होते हैं। लोग जो धार्मिक कारणों या सामाजिक एव सांसकृतिक दबाव के कारण अपनी समलैंगिकता से दुखी हैं, कभी कभी वे अपनी यौनिक भावनाओं का दमन करना या उन्हें छिपाना सीख लेते हैं।

गे एवं लेस्बियन लोग अन्य लोगों को भी समलैंगिक लोगों में बदल सकते हैं।

किसी को भी समलैंगिक व्यक्ति में ’परिवर्तित‘ नहीं किया जा सकता है उसी तरह जैसे समलैंगिकता का इलाज नहीं हो सकता है। आप बस ऐसे ही होते हैं। और अगर ऐसा संभव भी हो सकता हो तो गे एवं लेस्बियन लोग समलैंगिकता में अन्य लोगों की भर्ती करने नहीं निकले हैं! कुछ लोगों का कहना है की उन्हें अपनी यौनिक पहचान के बारे में ठीक तरह से किसी विशिष्ट व्यक्ति या अनुभव द्वारा पता चला - पर ऐसा नहीं है की उस विशिष्ट व्यक्ति या अनुभव ने उन्हें समलैंगिक ’बना दिया‘। ज़्यादातर गे एवं लेस्बियन लोगों का कहना है की वे अपनी यौनिक पहचान के बारे में हमेशा से जानते थे।

यदि आप किसी दूसरे लिंग के व्यक्ति के साथ शादी या सेक्स कर लें तो आपकी समलैंगिकता का इलाज संभव है।

यदि आप समलैंगिक हैं तो कोई भी विशिष्ट अनुभव आपको विषमलैंगिक नहीं बना सकता है वैसे ही जैसे कोई एक अनुभव आपको समलैंगिक नहीं बनाता। एक बार फिर, आप बस ऐसे ही होते हैं।

आपको समलैंगिक लोगों से सर्तक रहना चाहिए की कहीं वह आपकी ओर कदम तो न बढ़ा रहें हों।

सबसे पहले, केवल इसलिए की कोई व्यक्ति गे या लेस्बियन हैं इसका अर्थ यह नहीं होता की वे अपने लिंग के हर व्यक्ति के साथ सेक्स करना चाहते हैं। और इसका यह मतलब भी नहीं है की वे आवश्यक रुप से आपकी ओर आकर्षित होते हैं - अपने आप को बहलाएं ना!

दूसरी बात, यदि कोई गे या लेस्बियन व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित होते भी हैं तो उन्हें आपके द्वारा दिए गए उन संकेतों की जानकारी होने की संभावना है, जो आप यह बताने के लिए दे रहे हैं की आप विषमलैंगिक हैं।

अंततः, यदि आप गंभीर यौन उत्पीड़न को लेकर चिंतित हैं तो यह ध्यान में रखें की ज़्यादातर पुरुष जो पुरुषों का बलात्कार करते हैं, वे विषमलैंगिक होते हैं।

आप समलैंगिक लोगों के रुप एवं व्यवहार देखकर उनकी पहचान कर सकते हैं।

विषमलैंगिक लोगों की तरह ही सभी गे एवं लेस्बियन लोग एक जैसे नहीं दिखते और ना ही व्यवहार करते हैं। कुछ गे एवं लेस्बियन लोग हैं जो इस रुढ़ीबद्ध या पारंपरिक छवि के अनुरुप हो सकते हैं पर और बहुत से ऐसे लोग हैं जो इससे बिल्कुल अलग हैं। और, समलैंगिक लोग जीवन के हर क्षेत्र में हैं। (दूसरी ओर, गे पुरुष एवं लेस्बियन, किसी व्यक्ति के सूक्ष्म संकेतों को भी पहचान कर,यह बताने में प्रसिद्धरुप से सक्षम होते हैं, की व्यक्ति समलैंगिक हैं  - इस क्षमता को सामान्यतः ’गेडार‘ कहते हैं )

आप बच्चों के मामले में समलैंगिक लोगों पर विश्वाश नहीं कर सकते हैं - वे ज़्यादातर पीडोफाइल (’वह लोग जो सिर्फ़ बच्चों के साथ सेक्स करना पसंद करते हैं) होते हैं।

समलैंगिक होने और पीडोफाइल होने में कोई भी संबंध नहीं होता है। विषमलैंगिक एवं समलैंगिक दोनों ही पीडोफाइल हो सकते हैं।

समलैंगिक लोगों को एड्स होने की संभावना होती है - यह एक गे बीमारी है।

पूरे संसार में एचआईवी एवं एड्स विषमलैंगिक लोगों में ज़्यादा आम है।

समलैंगिक लोगों का सेक्स करने का तरीका घिनौना होता है।

विशेष रुप से बहुत से विषमलैंगिक पुरुष समलैंगिक सेक्स के विचार से ही भयभीत हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे यह स्वयं नहीं करना चाहेंगें। या फिर हो सकता है कहीं भीतर मन में उन्हें यह विचार उत्तेजक लगता हो और वे इस बात को मानना न चाह रहे हों।

यदि आपको समलैंगिक सेक्स खराब या घिनौना लगता है तो यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि आप अपने ही दृष्टिकोण से इसकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ उसी प्रकार से जैसे, आपका पसंदीदा खाना जो आपको बहुत स्वादिष्ट लगता हो, पर किसी दूसरे व्यक्ति के लिए घृणित हो सकता है।

लोग सेक्स को केवल गुदा मैथुन के साथ जोड़ते हैं। पर बहुत से गे लोग गुदा मैथुन नहीं करते हैं - वे सेक्स करने के दूसरे तरीके पसंद करते हैं। और निश्चय ही बहुत से विषमलैंगिक लोग भी गुदा मैथुन करते हैं। आप ऐसा करते हैं या नहीं, यह आपका निजी चुनाव है।

समलैंगिकता एक विकल्प या चुनाव है।

इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है की आप समलैंगिक या विषमलैंगिक होने के बीच चुनाव कर सकते हैं। समलैंगिकता इस बारे में है की आप अंदर से कैसा महसूस करते हैं, जो जन्म से भी निर्धारित हो सकता है।

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समलैंगिकता अप्राकृतिक है - यह एक रोग या मानसिक बीमारी है।

समलैंगिकता मानव यौनिकता का एक प्राकृतिक हिस्सा है। यह विचार की गे एवं लेस्बियन लोगों के साथ कुछ गड़बड़ या गलत है, संस्कृति, परम्परा एवं धर्म पर आधारित है। चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक नज़रिए से, समलैंगिक होना पूरी तरह सामान्य है।
समलैंगिकता प्रकृति का हिस्सा है, और केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि बहुत सारे जानवरों की प्रजातियों जिनमें कीट, मछलियाँ एवं स्तनधारी जीव शामिल हैं - हाथियों, डाल्फि़न, भालुओं, भैसों में भी समलैंगिक रिश्ते पाए गए हैं।

समलैंगिकता का इलाज संभव है।

समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं है अतः इसका ’इलाज‘ नहीं हो सकता है। इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है की कोई भी चीज़ आपको समलैंगिक से विषमलैंगिक होने में बदल सकती है। आप बस ऐसे ही होते हैं। लोग जो धार्मिक कारणों या सामाजिक एव सांसकृतिक दबाव के कारण अपनी समलैंगिकता से दुखी हैं, कभी कभी वे अपनी यौनिक भावनाओं का दमन करना या उन्हें छिपाना सीख लेते हैं।

गे एवं लेस्बियन लोग अन्य लोगों को भी समलैंगिक लोगों में बदल सकते हैं।

किसी को भी समलैंगिक व्यक्ति में ’परिवर्तित‘ नहीं किया जा सकता है उसी तरह जैसे समलैंगिकता का इलाज नहीं हो सकता है। आप बस ऐसे ही होते हैं। और अगर ऐसा संभव भी हो सकता हो तो गे एवं लेस्बियन लोग समलैंगिकता में अन्य लोगों की भर्ती करने नहीं निकले हैं! कुछ लोगों का कहना है की उन्हें अपनी यौनिक पहचान के बारे में ठीक तरह से किसी विशिष्ट व्यक्ति या अनुभव द्वारा पता चला - पर ऐसा नहीं है की उस विशिष्ट व्यक्ति या अनुभव ने उन्हें समलैंगिक ’बना दिया‘। ज़्यादातर गे एवं लेस्बियन लोगों का कहना है की वे अपनी यौनिक पहचान के बारे में हमेशा से जानते थे।

यदि आप किसी दूसरे लिंग के व्यक्ति के साथ शादी या सेक्स कर लें तो आपकी समलैंगिकता का इलाज संभव है।

यदि आप समलैंगिक हैं तो कोई भी विशिष्ट अनुभव आपको विषमलैंगिक नहीं बना सकता है वैसे ही जैसे कोई एक अनुभव आपको समलैंगिक नहीं बनाता। एक बार फिर, आप बस ऐसे ही होते हैं।

आपको समलैंगिक लोगों से सर्तक रहना चाहिए की कहीं वह आपकी ओर कदम तो न बढ़ा रहें हों।

सबसे पहले, केवल इसलिए की कोई व्यक्ति गे या लेस्बियन हैं इसका अर्थ यह नहीं होता की वे अपने लिंग के हर व्यक्ति के साथ सेक्स करना चाहते हैं। और इसका यह मतलब भी नहीं है की वे आवश्यक रुप से आपकी ओर आकर्षित होते हैं - अपने आप को बहलाएं ना!

दूसरी बात, यदि कोई गे या लेस्बियन व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित होते भी हैं तो उन्हें आपके द्वारा दिए गए उन संकेतों की जानकारी होने की संभावना है, जो आप यह बताने के लिए दे रहे हैं की आप विषमलैंगिक हैं।

अंततः, यदि आप गंभीर यौन उत्पीड़न को लेकर चिंतित हैं तो यह ध्यान में रखें की ज़्यादातर पुरुष जो पुरुषों का बलात्कार करते हैं, वे विषमलैंगिक होते हैं।

आप समलैंगिक लोगों के रुप एवं व्यवहार देखकर उनकी पहचान कर सकते हैं।

विषमलैंगिक लोगों की तरह ही सभी गे एवं लेस्बियन लोग एक जैसे नहीं दिखते और ना ही व्यवहार करते हैं। कुछ गे एवं लेस्बियन लोग हैं जो इस रुढ़ीबद्ध या पारंपरिक छवि के अनुरुप हो सकते हैं पर और बहुत से ऐसे लोग हैं जो इससे बिल्कुल अलग हैं। और, समलैंगिक लोग जीवन के हर क्षेत्र में हैं। (दूसरी ओर, गे पुरुष एवं लेस्बियन, किसी व्यक्ति के सूक्ष्म संकेतों को भी पहचान कर,यह बताने में प्रसिद्धरुप से सक्षम होते हैं, की व्यक्ति समलैंगिक हैं  - इस क्षमता को सामान्यतः ’गेडार‘ कहते हैं )

आप बच्चों के मामले में समलैंगिक लोगों पर विश्वाश नहीं कर सकते हैं - वे ज़्यादातर पीडोफाइल (’वह लोग जो सिर्फ़ बच्चों के साथ सेक्स करना पसंद करते हैं) होते हैं।

समलैंगिक होने और पीडोफाइल होने में कोई भी संबंध नहीं होता है। विषमलैंगिक एवं समलैंगिक दोनों ही पीडोफाइल हो सकते हैं।

समलैंगिक लोगों को एड्स होने की संभावना होती है - यह एक गे बीमारी है।

पूरे संसार में एचआईवी एवं एड्स विषमलैंगिक लोगों में ज़्यादा आम है।

समलैंगिक लोगों का सेक्स करने का तरीका घिनौना होता है।

विशेष रुप से बहुत से विषमलैंगिक पुरुष समलैंगिक सेक्स के विचार से ही भयभीत हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे यह स्वयं नहीं करना चाहेंगें। या फिर हो सकता है कहीं भीतर मन में उन्हें यह विचार उत्तेजक लगता हो और वे इस बात को मानना न चाह रहे हों।

यदि आपको समलैंगिक सेक्स खराब या घिनौना लगता है तो यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि आप अपने ही दृष्टिकोण से इसकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ उसी प्रकार से जैसे, आपका पसंदीदा खाना जो आपको बहुत स्वादिष्ट लगता हो, पर किसी दूसरे व्यक्ति के लिए घृणित हो सकता है।

लोग सेक्स को केवल गुदा मैथुन के साथ जोड़ते हैं। पर बहुत से गे लोग गुदा मैथुन नहीं करते हैं - वे सेक्स करने के दूसरे तरीके पसंद करते हैं। और निश्चय ही बहुत से विषमलैंगिक लोग भी गुदा मैथुन करते हैं। आप ऐसा करते हैं या नहीं, यह आपका निजी चुनाव है।

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