When no one asked me about my fantasy!
Shutterstock/fizkes/फोटो में मॉडल् हैं।

जब किसी ने मुझ से मेरी फैंटसी के बारे में नहीं पूछा !

द्वारा Vinayana Khurana मार्च 25, 03:19 बजे
मैं अपनी सहेलियों के साथ थी, हमने एक खेल खेलना शुरू किया। एक एक करके, सब लड़कियों को अपनी यौन कल्पनाओं के बारे में बताना था। मुझे नहीं पता कब और क्यों मेरी बारी रह गयी?

विनयना, 25 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और एक विकलांग स्त्री हैं।

वह मज़ेदार खेल 

तब हमारे कॉलेज की गर्मी की छुट्टियां चल रही थीं जब मेरी सहेलियों ने और मैनें कहीं बाहर जाने का फैसला किया। वह एक बहुत ही खूबसूरत दिन था, तो प्लान बना बना कि हम एक साथ पार्क जायेंगे। एक अच्छा सा स्थान ढूंढ़ने के बाद, हमने अपने कंबल बिछाये और बैठ गए। जिस गद्दे पर सब बैठे थे, उसके पास ही उन्होंनें मेरी व्हीलचेयर रख दी। 

बातें करते, गप्पें मारते, और हँसते खिलखिलाते हुए हमने सोचा कि एक खेल खेला जाये। हम सभी को अपनी अपनी यौन इच्छाओं और फैंटसी के बारे में बताना था।

एक एक करके, सब ने अपनी अपनी यौन इच्छाओं के बारे में बताना शुरू किया। निशा ने कहा कि किस तरह वह चॉकलेट और बर्फ़ के साथ स्पर्शित होना चाहती है जबकि सना और प्रिया दोनों ही समुन्दर के किनारे, तारों की छाँव में सेक्स चाहती थीं। प्रियंका के ख़्वाब तो बाँडेज सेक्स के थे , जिसे सुनकर हम सब हतप्रभ रह गए। मगर सबसे मज़ेदार बात जो मेरी बचपन की सहेली अनामिका की तरफ से आयी, उसने कहा कि वह किसी दिन एक लड़की को किस करना चाहती है !

हमें बहुत मज़ा रहा था। इस तरह अपने मन की बातों को शेयर करना बहुत रोमांचक और हिम्मत भरा काम था। मैं अपनी बारी का शिद्दत से इंतज़ार कर रही थी, क्योंकि मेरे पास भी कुछ था जो मैं बताना चाहती थी। 

उस घेरे में एक एक करके सबकी बारी रही थी, और मुझे नहीं पता कि जानबूझ कर या फिर ग़लती से, हर बार मेरी बारी छूट जाती थी। ग्रुप में किसी ने भी नहीं सोचा कि मेरे भी यौन सम्बंधित ख़्वाब हो सकते हैं! इस एहसास से मेरा दिल टूट रहा था और मैं तभी और वहीँ बोलना चाहती थी पर मैं बहुत दुखी और उदास हो गयी थी। और वैसे भी, वापस जाने का समय हो गया था !

मैं क्यों नहीं?

उस रात, मैं बेहद परेशान रही और सो भी नहीं पायी। मुझे बहुत अचंभा हो रहा था, यह सोच कर कि उन सब लोगों ने सोचा कि मेरी यौन इच्छाओं के ख़्वाब ही नहीं हो सकते सिर्फ इसलिए कि मैं व्हीलचेयर पर हूँ। मुझे समझ आया कि विकलांग व्यक्तियों की भी यौन संबंध या यौन इच्छाएं हो सकती हैं, ऐसा हमारे समाज में नहीं सोचा जाता। पर मैं यह समझने में असमर्थ थी कि क्यों ऐसा रूढ़िवाद हमारे समाज में बसता है?

मैं सोचती ही रही कि मुझे क्यों यौन सम्बन्धी रूप में नहीं देखा जा रहा था? क्या मुझे यह अधिकार नहीं कि मैं अपनी यौन इच्छाओं के विषय में बात कर पाऊं?

सुबह होने तक, मैं इस नतीजे पर पहुंची कि मेरे आस-पास के लोगों को विकलांगता के इस पहलू के बारे में जानकारी ही नहीं है। इसलिए मैंने अपनी सहेलियों के साथ बात करने का निश्चय किया। मैंने उन्हें वीकएंड पर अपने घर खाने पर आमंत्रित किया।

वे सब ख़ुशी ख़ुशी मान गयीं और फिर भोजन के बाद, मैंनें उनसे कहा कि हम फिर से वही यौन ख्वाबों के बारे में बताने वाला खेल खेलें। वे सब हैरान हुईं मगर मान गयीं। मैनें उनसे कहा कि पहले मैं बोलूंगी और मैनें अपने यौन संबंधी ख़्वाब /कल्पनाऍं सबको बतायीं। अनामिका का मुँह खुला रह गया पर निशा को जैसे कुछ एहसास हो गया। 

सना और प्रिया ने पिछली बार मेरी बारी ना आने के लिए मुझसे माफ़ी माँगी। फिर सभी ने ऐसा ही किया। फिर मैनें उन्हें बताया कि मुझे उस दिन मेरे प्रति उनके व्यवहार को लेकर कितना बुरा लगा था। 

वे सभी विकलांगता और यौन सम्बन्धी अपनी अनभिज्ञता पर स्तब्ध थीं। उन्हें इस बारे में बहुत बुरा लग रहा था और उन सब ने मुझसे वादा किया कि ऐसा फिर कभी नहीं होगा। विकलांग स्त्रियां भी यौन से संबंध रखती हैं और उनकी भी यौन कल्पनाएँ हो सकती हैं ,मैंने समझाया।

स्वीकृति, प्यार और ठहाके

उस घटना के बाद, मेरी सहेलियों ने यौन और यौन सम्बन्धी सभी टॉपिक्स पर मेरे साथ बातें करनी शुरू कर दीं। वे मुझे मेरे क्रश, कल्पनाओं को लेकर चिढ़ाने लगीं और मैं भी यही करती थी ! हम खूब बातें करते और ठहाके लगाते जो भी यौन सम्बन्धी बातें उन्हें समझ में आती थीं, वे सब मेरे साथ साझा करती थीं। 

ज़िंदगी अच्छी लगने लगी थी।और सामान्य भी। 

उन्होंने फिर कभी नहीं सोचा कि मैं यौन/सेक्स सम्बन्धी बातचीत कैसे कर पाऊंगी। सेक्स और विकलांगता के प्रति उनका नज़रिया बदल गया और इस बात के लिए मैं बेहद खुश थी। मुझे अच्छा लग रहा था कि कम से कम मैं कुछ लोगों के विचार तो बदल पायी। हालाँकि यह एक लम्बी यात्रा है पर मैं नहीं रुकूंगी!

गोपनीयता का ध्यान रखते हुए नाम बदल दिए गए हैं और फोटो में मॉडल् हैं।

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