जब कोरोना ने करवाई शादी!
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जब कोरोना ने करवाई शादी!

द्वारा Ketaki R फरवरी 9, 05:16 बजे
कबीर के माता-पिता ने आकांक्षा के साथ उसकी शादी तय करने की कोशिश की, मगर वो अरेंज्ड मैरिज के सख्त खिलाफ था। मगर चीज़ें तब बदल गयीं जब लॉक डाउन के दौरान दोनों ने एक दूसरे से बातचीत करनी शुरू की। कबीर ने अपनी कहानी लव मैटर्स इंडिया के साथ शेयर की।

कबीर (28) एक इंजीनियर है , जो अब पुणे में कार्यरत है। आकांक्षा (27) ,बेंगलुरू में स्थित एक एनजीओ में काम करती है।

घर जाने की चाह

अपनी जॉब से मेरा मन भर चुका था। दिल्ली से हज़ारों किलोमीटर दूर, अपने परिवार और दोस्तों से दूर, चेन्नई शहर में मैं अजनबी था। पहले मैंने सोचा था कि ये नौकरी लेने से मैं आगे बढ़ पाऊंगा, ऐसा लगा कि यह मेरे करियर के लिए एक सकारात्मक कदम होगा।

मगर तीन साल तक ऑफिस के बाहर किसी से संपर्कहोने के कारण मैं टूटता जा रहा था और मैंने नौकरी छोड़ कर अपने माता-पिता के पास वापस जाने का सोचा। प्लान यह था कि मैं अपने ही शहर में दूसरी नौकरी ढूंढ़ने का प्रयास करूंगा। शायद पगार उतनी अच्छी नहीं होगी पर कम से कम मैं घर पर तो रहूंगा। 

और तब आया कोरोना! 

जब प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा की मैं अपनी नौकरी छोड़ चुका था और नोटिस पीरियड पर काम कर रहा था। मेरी घर वापसी की फ्लाइट 29 मार्च की थी पर उससे 5 दिन पहले ही देशव्यापी लॉकडाउन लागू हो गया।

दूर घर में बंद

मैं अपने घर से दूर फँस चुका था बिना नौकरी के, बिना पैसों के साथ और घर तक पहुँचने का कोई ज़रिया नहीं था। 

लॉकडाउन का पहला महीना सबसे बुरा था। मुझे अपना किराया देने के लिए अपने परिवार और दोस्तों से पैसे उधार लेने पड़े। मैं अपना ज़्यादातर फर्नीचर बेच चुका था। सौभाग्यवश, मेरा इंटरनेट कनेक्शन नहीं कटा था, इसलिए मैं एक के बाद एक ऑनलाइन फिल्में देख कर टाइम पास कर रहा था। 

मेरे माता-पिता और बहन मुझे रोज़ कॉल करते थे, पर जल्दी ही वे कॉल्स उबाऊ हो गयीं। मैं अपने फ्लैट में फंसा हुआ था और वे भी अपने घर पर फंसे हुए थे और एक हफ्ते के बाद बातचीत करने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं बचा। 

और लॉकडाउन बढ़ता ही रहा।

आईडिया नहीं जमता

उसी दौरान मेरे माता-पिता अपने मित्र की बेटी से मेरा स्काइप के द्वारा परिचय करवाया। मैं 30 का होने वाला था, अभी अभी बेरोज़गार हुआ था और शादी के बारे में सोचने से भी पहले मैं अपने कैरियर में स्थिर होना चाहता था। और उसके अलावा अरेंज्ड मैरिज का पूरा आईडिया ही मुझे पसंद नहीं था। 

मगर मैं जितना ज़्यादा आकांक्षा से बात करता गया, उतनी ही मेरी उसमें दिलचस्पी बढ़ने लगी। वह कोलकाता के एक एनजीओ में काम करती थी जो कि कोरोना के चलते बंद हो गया थी, इसलिए उसके पास बहुत समय था। और वह भी एक अलग ही शहर में फंसी हुई थी। 

हमने स्काइप पर एक दूसरे से घंटों बात करनी शुरू कर दी। क्योंकि हम दोनों ही घर से दूर फंसे हुए थे, इसलिए माता-पिता का हस्तक्षेप भी नहीं था , वर्ना शायद हमारी नयी नयी दोस्ती, चालू होते ही ख़त्म हो जाती।

आदत बन गयी 

जुलाई आते आते लॉकडाऊन घटने लगा, और हम दोनों वापस दिल्ली आ गए। शुरुआत में जब हम अपने माता-पिता के पास आये तो हमने एक दूसरे को कॉल नहीं किया। मगर एक दूसरे से बात करना एक आदत सी बन गयी थी - और एक हफ्ता भी नहीं बीता कि हम दोनों फिर से बात करने लगे, आपस में घंटों मेसेज करते और चोरी छुपे फ़ोन कॉल करते। 

अगस्त तक हम समझ गए थे कि हम अपनी बाकी की ज़िंदगी एक दूसरे के साथ बिताना चाहते हैं। हमने छुप छुप के कॉल करना बंद किया और अपने अपने परिवारों से 'बात' चलाने का निश्चय किया। 

कुछ दिन बाद जब मैंने अपने माता-पिता से बात की,  मेरे पिता की मुस्कराहट और माँ की उपहास भरी नज़रों ने सब कुछ कह दिया। आखिरकार, यह उन्हीं का प्लान था जो कि एक बहुत सुन्दर रूप ले चुका था। 

आकांक्षा और मेरी नवंबर में शादी हो गयी। कोविड के प्रतिबंधों की वजह से बहुत ही कम लोग शादी में शामिल हो पाए  जो कि बहुत ही अच्छा रहा मुझे वैसे भी शादियों  में हज़ारों लोगों के शामिल होने से चिढ़ है, अक्सर हम आधे लोगों को ठीक से जानते भी नहीं है!  

यदि कोरोना ना होता

इस सब के चलते, आकांक्षा और मेरी नौकरी भी लग गयी - फिर से अलग अलग शहर में! अभी के लिए, क्योंकि सभी घर से काम कर रहे हैं, तो कोई परेशानी नहीं है, मगर हम दोनों तबादले की या एक दूसरे के शहर में नौकरी ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। 

हालाँकि, अगर यह महामारी नहीं होती, तो मैं अपने प्यार से कभी मिल ना पाता। मैं या तो चेन्नई वापस जाता , कुछ सालों तक काम करता जब तक कि मुझे कोई मिल नहीं जाता या फिर मैं अपने माता-पिता के दबाव में उनकी पसंद की किसी लड़की से शादी कर चुका होता। 

इसी तरह, आकांक्षा भी कोलकाता में रहती और काम में व्यस्त होती जब तक कि उसे कोई मिल नहीं जाता। 

और सबसे ज़रूरी बात यह है कि, क्योंकि हम दोनों के पास एक दूसरे से बात करने के लिए दुनिया भर का समय था, हमारा रिश्ता जो कि सामान्य स्थिति में फलने फूलने में कई साल लगा देता, वह तीन महीने के छोटे से समय में मजबूत बन गया। अभी भी हमारे पास एक दूसरे के बारे में जानने के लिए बहुत कुछ हैं, लेकिन जिस तरह से हम करीब आये, ये बहुत ही ख़ास था! 

 

पहचान की रक्षा के लिए, तस्वीर में व्यक्ति एक मॉडल है और नाम बदल दिए गए हैं।

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