आंटी जी, मेरी पत्नी ने गोवा बीच पर बिकिनी पहनी, लेकिन मुझे बताया ही नहीं!
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आंटी जी, मेरी पत्नी ने गोवा बीच पर बिकिनी पहनी, लेकिन मुझे बताया ही नहीं!

द्वारा Auntyji जुलाई 13, 03:55 बजे
आंटी जी, मेरी पत्नी अपने दोस्तों के साथ गोवा घूमने गई थी। वहां उसने बिकिनी पहनी और बीच पर तस्वीरें भी खिंचवाईं। मुझे इसकी जानकारी बाद में मिली। मुझे बिकिनी पहनने से कोई परेशानी नहीं है लेकिन उसने मुझे पहले बताया क्यों नहीं? अब मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है।" - मोहन, दिल्ली

ये उसकी मर्ज़ी है, पुत्तर जी

सबसे पहले तो एक बात गांठ बांध लो, मोहन पुत्तर जी। "गोवा गई थी, बीच पर गई थी, बिकिनी भी पहन ली... अब पुत्तर जी के दिमाग में पूरा डीजे बज रहा है!" लेकिन ज़रा ठंडा पानी पीकर सोचो कि मुद्दा बिकिनी है या कम्युनिकेशन?

बिकिनी पहननी है, सलवार-कमीज़ पहननी है या जींस-टीशर्ट, यह फैसला हर इंसान खुद करता है। जैसे आप अपने कपड़े खुद चुनते हैं, वैसे ही आपकी पत्नी भी अपने कपड़ों का चुनाव खुद कर सकती है।

गोवा के बीच पर बिकिनी पहनना कोई अनोखी बात नहीं है। बहुत-से लोग वहां आराम से तैरने, धूप का आनंद लेने और छुट्टियां बिताने के लिए ऐसे कपड़े पहनते हैं।

इसलिए बिकिनी पहनने को सही-गलत या इज़्ज़त से जोड़कर मत देखिए। कपड़े किसी इंसान के चरित्र का पैमाना नहीं होते, बेटा जी। पुत्तर जी, तेरे दिल में शायद यही चल रहा होगा-  "कुछ तो लोग कहेंगे..." लेकिन यहां लोग क्या कहेंगे, उससे ज़्यादा जरूरी है कि तू और तेरी पत्नी एक दूसरे पर कितना भरोसा करते हैं। 

हां, एक बार साझा कर सकते थे

अब बेटा जी, देख आंटी जी तेरी बात भी समझती हैं। अब जमाना बहुत खराब हो गया है। हर तरफ से बहुत बुरी खबरें आ रही हैं, तो हो सकता है तुझे बिकिनी से नहीं, बल्कि इस बात से बुरा लगा हो कि तेरी पत्नी ने यह बात पहले तुझसे साझा नहीं की।

रिश्तों में कई बार छोटी-छोटी बातें भी मायने रखती हैं। जब हम अपने पार्टनर से अपने प्लान साझा करते हैं, तो उसे लगता है कि वे हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं।

अगर तुझे यह बात खटकी है, तो अपनी भावना बताना बिल्कुल गलत नहीं है पुत्तर जी लेकिन फर्क समझ करके ही। तू अपनी पत्नी से ये कह सकता है- "अगर तुम पहले बता देतीं तो अच्छा लगता" और यह कहना कि "तुमने ऐसा किया ही क्यों?", दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।

इससे भरोसे की समस्या नहीं होनी चाहिए

उसने तुम्हें नहीं बताया, इसका मतलब सिर्फ इतना नहीं कि उसका मन था ऐसा करने का, बल्कि शायद वह तुमसे अपनी मन की बात कहने में झिझकती या डरती भी हो।

पुत्तर जी, अगर रिश्ते में बातें छुपानी पड़ रही हैं, तो ज़रूरत एक-दूसरे को दोष देने की नहीं, बल्कि रिश्ते को समझने और बेहतर बनाने की है। तुम दोनों को खुलकर बात करनी होगी, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना होगा और पति-पत्नी के साथ-साथ अच्छे दोस्त भी बनना होगा। क्योंकि जब दोस्ती मज़बूत होती है, तब मन की बातें छुपानी नहीं पड़तीं।

अब आते हैं असली मुद्दे पर बेटा जी

क्या तेरी पत्नी ने तुझे ये बात इसलिए नहीं बताई क्योंकि वह कुछ छिपाना चाहती थी? ऐसा ज़रूरी नहीं है बेटा जी।

हो सकता है, उसने सोचा हो कि यह कोई ऐसी बात नहीं है, जिसे अलग से बताने की जरूरत हो। हो सकता है, उसके लिए यह बस छुट्टियों का एक सामान्य हिस्सा रहा हो। कई बार हम किसी एक बात से बहुत सारी कहानियां बना लेते हैं। जैसे- 

"उसने बताया नहीं, मतलब जरूर कुछ गड़बड़ है।"

अरे नहीं, पुत्तर जी!

अरे पुत्तर जी, हर बात पर शक करोगे तो दिमाग अपने आप "दिल के अरमां..." वाला मोड ऑन कर लेगा। पहले बात तो कर लो, कहानी बाद में बनाना। 

भरोसा किसी एक तस्वीर, एक बिकिनी या एक ट्रिप से नहीं टूटता। भरोसा तब टूटता है, जब रिश्ते में लगातार झूठ, धोखा या सम्मान की कमी हो।

अगर तेरे मन में सवाल हैं, तो नाराज़ होने के बजाय खुलकर बात कर। हो सकता है, जिस बात को तूने बहुत बड़ा बना दिया हो, वो वास्तव में उतनी बड़ी बात हो ही नहीं। या तू ये समझ कि बेटा, फिल्में कम देखा कर, जहां पत्नी पर ही शक किया जाता हो!

आंटी जी का ज्ञान

पुत्तर जी, रिश्ते में प्यार जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी भरोसा और सम्मान भी है।

तेरी पत्नी ने क्या पहना, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि तुम दोनों एक-दूसरे की बात समझते हो या नहीं। हर बात को शक का कारण बना लोगे, तो रिश्ता मुश्किल हो जाएगा लेकिन अगर हर बात पर खुलकर बात करने से रिश्ता और मजबूत होगा।

तो ज़रा खुद से पूछ—तुझे सच में बिकिनी से परेशानी है या सिर्फ इस बात से कि तुझे इसके बारे में पहले पता नहीं था?

और याद रखो पुत्तर जी, रिश्ते कोई फिल्म नहीं होते जहां हर सीन के बाद बैकग्राउंड में "ऑल इज़ वेल" बजने लगे। रिश्ते बातचीत, भरोसे और समझदारी से चलते हैं।

 

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