मेरी शादी को करीब 4 साल हो गए थे लेकिन अभी तक मैं मां नहीं बन पाई। मैंने और मेरे पति आदित्य ने बहुत कोशिश की लेकिन कुछ सकारात्मक नहीं हुआ। दूसरे बच्चों को देखकर मन में हमेशा एक चिहुंक उठती कि मेरा बच्चा कब होगा। हमने सारे उपाय किए, जो भी हम कर सकते थे। जैसे- हर तरह के सेक्स पोजिशन्स ट्राई करना, सासू मां की हर हिदायत पर काम करना लेकिन कुछ भी नहीं हो रहा था। फिर मैंने महसूस किया कि मुझे पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होने लगा है, तो मैंने डॉक्टर से दिखाने का सोचा और यही बात अपने पति को भी बताई।
आदित्य ने ऑफिस से छुट्टी ली और हम दोनों कुछ ही दिन बाद डॉक्टर के यहां चेकअप के लिए चले गए। वहां मेरे कुछ टेस्ट्स हुए और रिपोर्ट्स एक-दो दिन बात मिलने की बात पता चली, तो हम दोनों वापस आ गए।
PCOS की हुई पहचान
कुछ दिनों बाद हॉस्पिटल से कॉल आया कि आपके रिपोर्ट्स आ गए हैं। मैं और आदित्य रिपोर्ट लाने चले गए, जहां डॉक्टर ने हमें बताया कि मुझे PCOS है- यानी कि Polycystic Ovary Syndrome है, जिस कारण मुझे पीरियड्स के दौरान काफी दर्द होने लगा है और कंसीव करने में भी मुश्किल हो रही थी क्योंकि सिस्ट का साइज बढ़ गया है। इसके लिए डॉक्टर ने मेरा एक ऑपरेशन किया और कुछ सलाह दिए और कुछ दवाइयां दीं। करीब 6 महीनों तक मैंने अपनी सेहत पर ध्यान दिया और फिर हम दोनों ने दोबारा कोशिश करने का फैसला किया। महीनों बाद मैं खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ महसूस कर रही थी।
खुद को ठीक महसूस करने के बाद मैंने और आदित्य ने दोबारा बच्चे के लिए कोशिश की और इस बार जब प्रेगनेंसी किट पर मैंने दो लाइनें देखीं, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। हां, मैं प्रेगनेंट थी। मैंने जल्दी से आदित्य को कॉल करके बताया कि वो पापा बनने वाला है और सासू मां को भी बता दिया कि वो दादी बनने वाली हैं।
मैं बहुत खुश थी और वो सबकुछ करने की कोशिश कर रही थी कि मैं और मेरा बच्चा एकदम स्वस्थ रहे लेकिन एक रोज जब मैं किचन में काम कर रही थी, तब अचानक मुझे अपनी योनी से कुछ गिरता हुआ महसूस हुआ। कमरे में आकर देखा तो खून था। मेरा पूरा शरीर सहम गया। ऐसे लगने लगा कि एक सिहरन पूरे शरीर में फैल रही है। मैंने जल्दी से सासू मां को बताया और हम दोनों डॉक्टर के यहां पहुंच गए, जहां हमें पता चला कि मेरी कोख में पल रहा बच्चा इस दूनिया मे आने से पहले ही चला गया।
डॉक्टर ने क्यों कहा पति का भी टेस्ट कराओ?
मैं बहुत उदास हो गई और तब तक आदित्य भी वहां पहुंच गया था। जब डॉक्टर ने हम दोनों को इस समय साथ देखा, तब उन्होंने कहा, "मेघना, तुम्हारी रिपोर्ट्स तो नॉर्मल थी। मुझे मिसकैरेज का कोई कारण समझ नहीं आ रहा क्योंकि तुम फिट हो गई थी।” इसके बाद डॉक्टर ने आदित्य को जाँच कराने के लिए कहा, तो उसने हामी भर दी। आदित्य की जाँच कराकर और सैंपल देकर हम दोनों घर आ गए।
कुछ दिनों बाद आदित्य की रिपोर्ट भी आ गई और हमें दोबारा हॉस्पिटल बुलाया गया। जहां पता चला कि आदित्य की स्पर्म क्लाविटी खराब है, जिस कारण प्रेगनेंसी में समस्या आ रही है और मिसकैरेज हुआ। मेरे लिए विश्वास करना थोड़ा मुश्किल था क्योंकि इतने समय से मैं खुद को दोषी मान रही थी लेकिन कहीं ना कहीं आदित्य की जाँच भी जरूरी थी, इस बात का अंदाजा मुझे देर से हुआ। इसके बाद कुछ इलाज हुए और अंततः काफी मुश्किलों और थोड़े कांपलिकेशन्स के बाद मैं एक बेटे की मां बन गई।
सिर्फ महिला नहीं, पुरुष की जांच भी जरूरी है
हालांकि इस दौरान मुझे एहसास हुआ कि पैरेंट्स बनना या मां बनना भी केवल मेरी जिम्मेदारी नहीं है बल्कि मेरा पार्टनर भी उतना ही जिम्मेदार है। अगर बच्चा होने में देरी हो या किसी तरह की समस्या हो, ना केवल लड़की की बल्कि लड़के की जाँच भी करानी चाहिए ताकि सही उपाय मिल सके।
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