Gay and living together in India
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भारत में समलैंगिक जोड़ों के एक साथ रहने के मायने

द्वारा Aletta Andre अक्टूबर 21, 05:51 बजे
हमारे पड़ोसियों को लगता है कि हम दोनों रूममेट हैं। मैंने अपनी तरफ़ से तो उन्हें कुछ नहीं बताया क्योंकि मैं बहुत सामाजिक व्यक्ति हूँ भी नहीं। वैसे भी भारत में समलैंगिक जोड़े के रूप में रहने के लिए काफी हिम्मत की ज़रूरत होती है।

मुंबई में बतौर एडिटर काम करने वाले 40 वर्षीय नितिन कहते हैं कि ये मेरे लिए इतना असंभव भी नहीं था। नितिन पिछले डेढ सालों से अपने 25 वर्षीय समलैंगिक पार्टनर थॉमस के साथ रह रहे हैं जो एक मोबाइल कंपनी के लिए काम करता है।

हम इसके बारे में कुछ भी झूठ नहीं बोलेंगे क्योंकि जो भी समस्याएं आएंगी उससे लड़ने के लिए हम पहले से ही तैयार हैं। लेकिन हमारे पड़ोसियों ने कभी हमसे पूछा ही नहीं, और ना ही हमारे मकान मालिक और हमें घर दिलाने वाले ब्रोकर ने हमारे बारे में कभी कुछ पूछा। मैं उनसे जान बूझकर कुछ नहीं छुपा रहा था, इसलिए वे हमारे बारे में क्या सोच रहे थे मुझे नहीं पता। लेकिन हम दोनों ने अपने प्रति उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं महसूस किया।

समारोह: नितिन और थॉमस आगे बताते हैं कि भारत में समलैंगिक विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं है लेकिन साथ रहने के और भी तरीके हैं। वास्तव में इससे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है क्योंकि हम एक दूसरे के प्रति पहले से ही प्रतिबद्ध हैं। लेकिन हां, हम निश्चित रुप से चाहते हैं कि जो लोग हमसे प्यार करते हैं उनके साथ मिलकर एक समारोह किया जाए। ऐसा किसी पुजारी या पादरी की उपस्थिति में ही संभव है। मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूं जिन्होंने ऐसा किया है। भारत में समलैंगिक जोड़े औपचारिक रूप से रजिस्टर नहीं हो सकते इसलिए उन्हें शादीशुदा जोड़ों की तरह फायदे भी नहीं मिलते हैं।

बच्चे: उनमें से एक फायदा है मिलकर बच्चे को गोद लेना। नितिन कहते हैं कि अभी वे दोनों इस पड़ाव पर नहीं पहुंचे हैं जिसमें बच्चे की देखभाल करना व्यावहारिक रूप से संभव हो लेकिन वे भविष्य में अपना परिवार बढ़ाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि यह भारत में संभव है। सिंगल पैरेंट बच्चे को गोद ले सकते हैं। इसलिए हममें से कोई एक ही बच्चे का आधिकारिक अभिभावक हो सकता है, लेकिन बच्चे की परवरिश हम दोनों की जिम्मेदारी होगी।

आत्मविश्वास: नितिन का मानना है कि पिछले कुछ सालों में भारत में समलैंगिकता के प्रति लोगों के नज़रिए में बदलाव आया है। विशेष रूप से जुलाई 2009 से, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि समलैंगिक यौन संबंध अब अपराध नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद सार्वजनिक मंचों पर इसके बारे में खुलकर चर्चा हुई है और लोग अब पूरे आत्मविश्वास से यह स्वीकार करते हैं कि वे समलैंगिक हैं। लेकिन क्या इससे समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिल जाएगी? वे कहते हैं कि मैं पूरी तरह से इसकी संभावनाओं को ख़ारिज नहीं कर रहा हूं लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इतनी जल्दी कुछ होने वाला है।

हालांकि नितिन का परिवार उनके साथ है लेकिन भारत में समय पर शादी और बच्चे पैदा करने के लिए घरवालों की तरफ से काफी दबाव होता है। साथ ही वे अपने बेटे के भविष्य को लेकर भी चिंतित रहते हैं।

वे मुझसे कई सवाल करते हैं। वे सोचते हैं कि यदि मेरे और मेरे पार्टनर के संबंध टूट गए तो भविष्य में मेरी देखभाल कौन करेगा। बिना शादी के उनके लिए यह विश्वास करना उतना ही कठिन है जितना मेरे लिए यह विश्वास करना कि ऐसा कुछ नहीं होगा ।

परिवार: कई भारतीय समलैंगिक जोड़े विदेश में जाकर बस जाते हैं। लेकिन नितिन ने इसके बारे में कभी नहीं सोचा। मुझे लगता है कि सिर्फ़ समलैंगिक होना देश छोड़ने का कारण नहीं हो सकता है, इसके लिए और कई कारण होने चाहिए। विदेशों में मैं जिन समलैंगिक लोगों को जानता हूं वे अपने परिवार से दूर हो जाते हैं। मुझे अपने परिवार से बहुत प्यार है, इसलिए मैं यहां हूं।

 

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