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माहवारी में पीड़ा: कारण, उपचार और कब जाएँ डॉक्टर के पास

क्या आपको मासिक धर्म / पीरियड्स के दौरान बहुत दर्द होता है - इतना की आप कोई काम नहीं कर पाते? तो फिर आइये, माहवारी के दौरान होने वाली दर्द की कुछ वजहों को जानते हैं और यह समझते हैं कि आप इसके लिए क्या कर सकते हैं।

कहानी हर स्त्री की?

पीरियड्स के दर्द से मेरा सामना 15 साल की उम्र में हुआ - मेरी माहवारी शुरू होने के कुछ साल बाद। मुझसे छोटी कज़िन, एक नज़दीकी सहेली,एक आंटी  - आस-पास की सभी औरतों को पीरियड्स के दौरान अलग अलग स्तर पर दर्द होता था । और मुझे ऐसे लगा की शायद पीरियड्स के दौरान दर्द होना एक आम बात है। 

मुझे करीबन 17 और साल लगे ये जानने के लिए के लिए की पीरियड में तेज़ दर्द होना उतना आम भी नहीं। और ये तब हुआ जब मैं एंडोमेट्रिओसिस नाम की एक बीमारी से ग्रसित पाई गयी। मेरी कज़िन और सहेली भी पीसीओएस से ग्रसित पाए गए और आंटी को यूटरीन फाइब्रॉइड्स निकले। 

इन अनुभवों से यह सीखा कि डिस्मेनोरिहा - मासिक धर्म के दौरान होने वाला अत्यधिक दर्द - सामान्य बात नहीं है और इसके पीछे हमेशा कोई मेडिकल कारण होता है। 

हाँ, यह सही है कि ज़्यादातर महिलाओं को अक्सर पीरियड के पहले या उसके दौरान हल्का फुल्का दर्द, मरोड़ या अन्य तकलीफें जैसे पेट फूलना या जी मिचलाना आदि होते हैं। लेकिन यदि दर्द इतना ज़्यादा है कि वह आपके रोज़मर्रा के कामों को प्रभावित कर रहा है ,तो यह एक चिंता का विषय है और किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। 

इसके पीछे क्या कारण हैं और इस तकलीफ को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है? आइये डिस्मेनोरिहा पर को विस्तार से समझें।

डिस्मेनोरिहा क्या है?

डिस्मेनोरिहा मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द और असुविधा के लिए प्रयोग किया जाने वाला मेडिकल शब्द है। आधे से ज़्यादा स्त्रियों को डिस्मेनोरिहा का अनुभव होता है , खासकर पीरियड के पहले या दूसरे दिन। यदि दर्द कम और सहने लायक है तो उसे सामान्य समझा जाता है। परन्तु कुछ स्त्रियों के लिए डिस्मेनोरिहा बहुत बढ़ा हुआ रूप ले लेता है जिसकी वजह से वे साधारण काम और क्रियाएं भी नहीं कर पाती हैं। 

इस असुविधा और दर्द के स्तरों पर आधारित, डिस्मेनोरिहा को दो प्रकार में बांटा गया है :

प्राइमरी डिस्मेनोरिहा: यह उस हल्के-फुल्के दर्द और मरोड़ को इंगित करता है जो अमूमन हर स्त्री को पीरियड्स से पहले या उसके शुरूआती एक-दो दिन तक महसूस होता है। प्राइमरी डिस्मेनोरिहा प्रोस्टाग्लैंडिस नमक उन प्राकृतिक रसायन के कारण होता है जो कि गर्भाशय की परत में उत्पन्न होते है और गर्भाशय की मांसपेशियों और रक्त कोशिकाओं के संकुचित होने की वजह बनते हैं। इस क्रिया द्वारा गर्भाशय को एंडोमेट्रियल परत को गिराने में सहायता मिलती है, जिसकी वजह से रक्तस्राव होता है। जैसे जैसे आपका रक्तस्राव होता है, प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्तर गिरना शुरू होता है और दर्द कम होने लगता है।

सेकेंडरी  डिस्मेनोरिहा: पीरियड के दौरान तेज़ दर्द किसी प्रकार की मेडिकल स्थिति या प्रजनन अंगों में किसी प्रकार के रोग /विकार की वजह से होता है। यह दर्द सामान्य माहवारी के दर्द और मरोड़ से अधिक तेज़ होता है और लम्बे समय तक चलता है। उदाहरण के लिए कुछ स्त्रियों में यह दर्द उनके पीरियड से कुछ दिन पहले ही शुरू हो जाता है और पीरियड के दिनों के साथ बढ़ता जाता है। इसके साथ कुछ और लक्षण जैसे माइग्रेन, दस्त लगना, स्तनों में दर्द आदि हो सकते हैं। सेकेंडरी डिस्मेनोरिहा की पहचान  पेट के निचले हिस्से से उठने वाले दर्द - जो कमर के पीछे तक जाता है और जांघों तक आता है - के द्वारा भी की जाती है।  

पीरियड्स के दौरान इतना अधिक दर्द क्यों होता है?

जैसा कि हमने पहले बताया, सेकेंडरी डिस्मेनोरिहा या पीरियड के दौरान बहुत तेज़ दर्द किसी अंदरूनी मेडिकल स्थिति या रोग की वजह से होता है। उनमे से कुछ कारण इस प्रकार हैं :

  • एंडोमेट्रिओसिस: दर्दभरे पीरियड्स का एक मुख्य कारण एंडोमेट्रिओसिस है। इस अत्यंत दर्दभरी स्थिति में, गर्भाशय की परत से कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में बढ़ने लगती हैं - आमतौर से ओवरीज़ में , फैलोपियन ट्यूब्स या पेल्विस टिश्यू की परत में , जिसके कारण माहवारी का दर्द और मरोड़ बढ़ जाते हैं। एंडोमेट्रिओसिस की वजह से स्त्रियों को मासिक धर्म के समय अन्य लक्षण जैसे अधिक पेट फूलना, अपच होना, दस्त लगना, माइग्रेन या जी मिचलाना आदि भी हो सकते हैं।
  • प्रीमेन्सट्रअल सिंड्रोम (पीएमएस): प्रीमेन्सट्रअल सिंड्रोम या (पीएमएस), पीरियड्स से पहले हॉर्मोन्स में बदलाव द्वारा होने वाली सामान्य स्थिति है जो मासिक धर्म के दर्द को अधिक बढ़ा सकती है। इसकी पहचान मूड में बदलाव या अधिक मीठा खाने की इच्छा होती है। 
  • यूटरीन फाइब्रॉइड्स : फाइब्रॉइड्स, गर्भाशय में होने वाले एक तरह के बिनाइन (जो कैंसर नहीं बनते) ट्यूमर होते हैं जिसके कारण माहवारी के दौरान असामान्य दर्द होता है जो कि इनके अप्राकृतिक विकास की वजह से अंगों पर अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण होता है।
  • पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज़ : पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज़(पीआईडी) प्रजनन अंगों जैसे गर्भाशय,ओवरीज़ या फैलोपियन ट्यूब्स में होने वाला संक्रमण है जो यौन रूप से ट्रांसमिटेड बैक्टीरिया द्वारा होता है। पीआईडी के कारण इन अंगों में सूजन अथवा जलन हो जाती है, जिसकी वजह से पीरियड्स के समय में अधिक असुविधा होती है।
  • एडेनोमोसिस: एक असाधारण स्थिति जिसमे गर्भाशय की परत गर्भाशय की मांसपेशियों पर बढ़ने लगती है। एडेनोमोसिस की वजह से दबाव , सूजन और जलन और दर्द भी होता है। इसे बहुत अधिक रक्तस्राव और अधिक दर्द वाले पीरियड का एक कारण माना जाता है।
  • सर्वाइकल स्टेनोसिस : यह एक असामान्य मेडिकल स्थिति है जिसमें सर्वाइकल द्वार इतना छोटा होता है कि वह मासिक धर्म के दौरान रक्त के बहाव को रोकता है जिसकी वजह से गर्भाशय में दबाव और दर्द होता है। 
  • कॉपर आइयूडी : गर्भनिरोधक तरीके जैसे कॉपर आइयूडी के कारण भी पीरियड्स ज़्यादा मात्रा में और दर्द भरे हो सकते हैं। यदि यह आईयूडी की वजह से है तो आपको इंसर्शन के अगले चक्र से ही दर्द और रक्तस्राव में बढ़ोतरी का अनुभव होगा और यह सिलसिला कुछ महीनों तक चल सकता है।लेकिन अगर आप कॉपर आईयूडी का कुछ वर्षों से प्रयोग कर रहे हैं और आपके पीरियड्स के समय दर्द अभी हाल ही में शुरू हुआ है, तो फिर उसकी वजह कुछ और भी हो सकती है।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस की वजह से या तो किसी स्त्री के पीरियड्स मिस हो सकते हैं, जिससे एक साल में 8 मासिक चक्र या उससे भी कम हो सकते हैं, या फिर पीरियड्स ज़्यादा और जल्दी हो सकते हैं , 21 या उससे भी कम दिनों के चक्र के साथ। दोनों ही स्थितियों में रक्तस्राव की वजह से तेज़ पेट दर्द और मरोड़ होते हैं।

इन मेडिकल स्थितियों के अलावा, दर्द का स्तर इन कारणों से भी प्रभावित होता है जैसे :

  • 11 वर्ष की उम्र से पहले प्यूबर्टी में प्रवेश 
  • 20 साल से कम उम्र होना 
  • धूम्रपान 
  • पीरियड्स के दौरान दर्द होने की पारिवारिक हिस्ट्री 
  • अनियमित पीरियड्स 
  • प्रसव ना होना 

पीरियड्स के दौरान दर्द का उपचार 

पीरियड्स के समय होने वाले दर्द का उपचार, उस दर्द की वजह पर निर्भर करता है। इसके लिए आपको महिला रोग और प्रसूति विशेषज्ञ डॉक्टर से मशवरा करना होगा। आपकी डॉक्टर आपको निम्न से कोई उपचार बता सकते  हैं:

  • दर्द निवारक गोली (पेन किलर): बाजार में उपलब्ध दर्द की दवाई जैसे इबूप्रोफेन,नेप्रोक्सेन सोडियम या ऐसीटामेनोफेन आदि पीरियड्स के दौरान दर्द का नियंत्रण करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई जा सकती हैं। 
  • हार्मोनल बर्थ कंट्रोल: हार्मोन पर आधारित गर्भ-निरोधक जैसे गर्भनिरोधक दवाएँ, टीका, इम्प्लान्ट या आईयूडी, आदि द्वारा ओवुलेशन को नियंत्रित करने और दर्द की तीव्रता को कम करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। 
  • सर्जरी: फाइब्रॉइड्स या एंडोमेट्रिओसिस जैसी स्थितियों में, लक्षणों को कम करने के लिए सर्जिकल प्रोसीजर आदि किये जा सकते हैं। 

पीरियड्स के समय होने वाले दर्द के लिए घरेलू इलाज 

इन चिकित्सकीय उपचार के अलावा, आप दर्द के कम होने के लिए कुछ घरेलू इलाज भी अपना सकते हैं। कुछ असरदार इलाज इस प्रकार हैं :

  • हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल को दर्द की जगह पर मरोड़ और दर्द में आराम देने के लिए इस्तेमाल करें। 
  • दर्द निवारण के लिए प्रभावित जगह पर तेल से लगभग 20 मिनट मालिश करें।  
  • कॉफ़ी/चाय  ,कोला पेय, ज़्यादा नमक और वसा वाले भोजन और अल्कोहल आदि का पीरियड के दौरान प्रयोग ना करें। 
  • गैस और पेट फूलने से बचने के लिए माहवारी के समय अजवाइन और सौंफ का पानी पियें , जो दर्द को कम कर सकता है। 
  • इस दौरान ज़्यादा पेय पदार्थ लें। 
  • ऑर्गैस्म भी दर्द से शीघ्र और देर तक आराम दे सकता है। यदि आप यौन रूप से सक्रिय हैं तो अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनायें। या फिर आप मास्टरबेट भी कर सकते हैं। 
  • व्यायाम भी हॉर्मोन नियंत्रण में मदद करता है जो पीरियड के दौरान दर्द की तीव्रता पर सीधा असर डाल सकता है। चाहे आप पीरियड के दौरान व्यायाम ना कर पाएं परन्तु बाकी के महीने के लिए व्यायाम की नियमितता बनाये रखें।

पीरियड्स के समय होने वाला दर्द आपकी ज़िंदगी की गुणवत्ता पर उल्टा असर डाल सकता है। गौर करें कि माहवारी के दौरान होने वाला तीव्र दर्द सामान्य नहीं है और इसके साथ समझौता करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप इससे जूझ रही हैं, तो अपनी डॉक्टर से सलाह लें और अपनी जीवन शैली में बदलाव की कोशिश रहें - व्यायाम करना, संतुलित भोजन खाना, ऐल्कोहॉल कम करना और धूम्रपान छोड़ना आदि दर्द की तीव्रता को कम कर सकते हैं।

पहचान की रक्षा के लिए, तस्वीर में व्यक्ति एक मॉडल है।

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