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Shutterstock/Syda Productions

पिताजी ने बताया पैड कैसे लगाना है

सन्वी को बहुत घबराहट महसूस हुई जब उसकी दोस्त तान्या को अपनी स्कर्ट पर लाल दाग के साथ, स्कूल के बीच में ही घर भागना पड़ा। अगले दिन तान्या ने कहा कि यह "लडकियों वाली बात" थी और केवल माँ ही इसके बारे में बात कर सकती हैं। सिर्फ़ लड़कों के घर में बड़ी होने वाली सन्वी बताती हैं की आखिरकार “लडकियों वाली बात” उनके साथ की किसने!

19 वर्षीय सन्वी चंडीगढ़ के एक कॉलेज में छात्रा हैं और उन्होंने  लव मैटर्स इंडिया के लेखक अर्पित चिक्कारा के साथ अपनी कहानी साझा की

मेरे पापा, मेरी माँ*

रोहन भैया और मुझको हमारे पापा ने ही बड़ा किया था। वही हमारे दोस्त, दार्शनिक और मार्गदर्शक थे। मुझे याद है कि वह मुझे स्कूल के लिए तैयार किया करते थे। मेरे स्कूल ड्रेस की सबसे अच्छी प्लेटें बनाते थे, दुनियाँ का सबसे मजे़दार टिफिन पैक करते- और अकेले ही हमारी सभी पीटीए मीटिंग्स की कमान संभालते।

मेरी प्राथमिक शिक्षा खत्म होते होते मुझे पापा और भैया के सामने कपड़े बदलने में शर्म महसूस होने लगी थी। जब मेरे पापा ने मेरी इस असुविधा को महसूस किया, तो उन्होंने मुझे कहा कि मुझे वही करना चाहिए जिसे करते हुए मैं खुद को सहज महसूस करती हूँI इसलिए सात साल की उम्र से ही, मैंने खुद नहाना, तैयार होना और ख़ुद का ख्याल रखना शुरू कर दिया।

लड़कियों वाली बातें

जब मैं तक़रीबन शायद दस साल की थी, तो मैंने देखा कि रोहन भैया ने टीवी पर एक सैनिटरी नैपकिन का विज्ञापन आते ही झट से चैनल को बदल दिया। मुझे उत्सकुता तो बहुत हुई लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि मुझे भैया से इसके बारे में पूछना चाहिए या नहींI वो मुझे ख़ुद मुझे बहुत घबराये हुये लगे।

और फिर स्कूल में एक दिन, मेरी दोस्त तान्या रोती हुई अपनी स्कर्ट पकड़ कर बाथरूम की तरफ़ भागती हुई दिखी। मैंने देखा उसकी स्कर्ट पर लाल धब्बे थे। बाद में हमारे टीचर ने उसे मेडिकल रूम में जाने के लिए कहा और फ़िर उसकी माँ उसे घर लेने के लिए आ गयीI कक्षा में हर कोई तान्या के बारे में परेशान था और सोच रहा था कि कहीं वो बीमार तो नहीं हो गयी थी? वह रो क्यों रही थी?

अगले दिन मैंने तान्या से पूछा और उसने कहा कि यह लड़कियों की बात हैऔर मुझे इसके बारे में अपनी माँ से पूछना चाहिए। मैं घर आयी और पापा वहां नहीं थे तो मैंने भैया से उस बारे में पूछा। वह मेरा सवाल सुनकर शर्मिंदगी मह्सूस कर रहा थाI उसके मुंह से बस यही निकल सका, ‘यह सब बड़ों की बाते हैं, तू अभी छोटी है'I

पिता ने हल की मुश्किल

भैया के कमेंट ने मुझे बहुत ही असमंजस में डाल दिया। बड़ों की कोई बात तान्या को कैसे हो सकती है! पापा  काम की वजह से टूर पर थे और इसलिए मुझे उनके वापस लौटने का इंतजार करना पड़ा। भैया और तान्या के जवाबों ने मुझे थोड़ा संकोच में भी डाल दिया था। क्या मुझे इसके बारे में अपने पापा से पूछना चाहिए? लेकिन असल में मैं उनके बहुत क़रीब थी और वही मेरे लिए माँ और पिता दोनों थेI

और इसलिए जब वह अपने काम से लोटे, तो मैंने उन्हें दरवाजे पर ही पकड़ लिया। मैंने उनसे तान्या के साथ जो हुआ सब बताया और पुछा कि क्या यह सब मेरे साथ भी होगा! मैं समझ सकती थी कि तान्या के साथ जो भी हुआ था वह टीवी पर आने वाले उस विज्ञापन से जुड़ा था लेकिन मुझे उसके बारे में पूरी स्पष्टता नहीं हो पायी थीI

मुझे अभी भी उनके चेहरे के भाव याद हैं। भाई के बिलकुल विपरीत मेरे पापा बहुत शांत थे। उन्होंने मुझे शर्मिंदा महसूस नहीं करवाया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे साथ उनके अध्ययन कक्ष की ओर चलने के लिए कहाI उन्होंने रोहन भैया को भी आने के लिए कहा।

जीव-विज्ञान के प्रोफेसर होने के नाते, उनकी दराजें मानचित्रों से भरी हुई थीI उन सभी में से उन्होंने एक बाहर निकाला। मेरे भैया को अब एहसास हो चुका था कि बातचीत किस बारे में है और जब पापा ने एक नग्न मानव शरीर का चित्र दिखाया तो उसकी शर्मिंदगी छिप नहीं पा रही थीI मेरे पापा ने उसकी शर्मिंदगी को महसूस किया और हम दोनों को कहा की हमें हमारे शरीर को लेकर बिलकुल भी शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है।

उन्होंने हमें कहा कि हम दोनों बड़े हो रहे हैं और यह जानना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है कि हमारे शरीर में क्या बदलाव हो रहे हैंI उन्होंने हमें समझाया कि मेरे भाई और मेरे अंग कैसे अलग थे और ऐसा इसलिए था क्योंकि मेरा शरीर इस तरह से विकसित हो रहा था कि वो एक बच्चे को जन्म दे सकेंI

अपने शरीर को समझना

तब उन्होंने हमें मासिक धर्म के बारे में बताया, यह समझाते हुए कि माहवारी चक्र के दौरान, एक महिला का शरीर जन्म के लिए तैयार होता है। और जब शरीर गर्भ धारण नहीं करता है, तो शरीर यह रक्त बाहर कर देता हैI उन्होंने हमें यह भी बताया कि यह प्रक्रिया हर महीने होती है! और यदि कोई व्यक्ति अपनी माहवारी के लिए तैयार नहीं होता है, तो यह रक्त कपड़े पर दाग लगा सकता है और यह बिल्कुल सामान्य है।

उन्होंने मुझे बताया कि मैं भी जल्द ही इसका अनुभव करुँगी और मुझे इससे डरने या शर्मिंदा होने की बिलकुल भी ज़रूरत नहीं है। मैंने पूछा कि, क्या यह सभी लड़कियों के साथ होता है। उन्होंने कहा हाँ।अब जाकर तान्या का रहस्य हल हुआ था!

उस रात की बातचीत के बाद, मेरे काफ़ी सवाल हल हो गए थे लेकिन फ़िर भी एक डर था कि एक दिन यह सब मेरे साथ भी होगाI

अगले दिन, रात के खाने के बाद, पापा ने कहा कि वह मुझे मेरी पहली माहवारी के लिए तैयार करना चाहता हैं - ताकि मुझे पता हो कि ऐसा होने पर मुझे क्या करना हैI उन्होंने मेरे भाई को हमारे साथ जुड़ने के लिए कहा और यह भी कहा कि सभी लड़कों के लिए माहवारी के बारे में भी जानना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने एक सैनिटरी पैड निकाला बिलकुल वैसा ही जैसा टेलीविजन पर दिखाया गया था। उन्होंने मुझे सिखाया कि इसका उपयोग कैसा करना है। उन्होंने मुझे बाथरूम में जाने और इसे आज़माने के लिए कहा। मुझे पहले संकोच महसूस हुआ लेकिन फिर मैंने यह कर लिया।

मैंने पैड को अपने अंडरवियर में वैसे ही लगाया जैसा कि पैकेट के पीछे निर्देशित था। यह बिलकुल भी मुश्किल नहीं था और मुझमें अचानक आने वाले बदलाव से आत्मविश्वास ज़्यादा और डर कम लग रहा था। मुझे माहवारी जल्द ही शुरू हो गई लेकिन मैं तान्या की तरह घबराई नहीं थी।

*गोपनीयता बनाये रहने के लिए नाम बदल दिए गए हैं ओर तस्वीर के लिए एक मॉडल का इस्तेमाल हुआ है

लव मैटर्स और मिस मैन्स सभी महिलाओं को #Nomorelimits वर्ल्ड मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) पर एक खुश और सुरक्षित महावारी की कामना करती हैं।

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लेखक के बारे में: अर्पित छिकारा को पढ़ना, लिखना, चित्रकारी करना और पॉडकास्ट सुनते हुए लंबी सैर करना पसंद है। एस आर एच आर से संबंधित विभिन्न विषयों पर लिखने के अलावा, वह वैकल्पिक शिक्षा क्षेत्र में भी काम करते हैं। उनको इंस्टाग्राम पर भी संपर्क कर सकते हैं।

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