Asexuality
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अलैंगिकता: 7 मुख्य मिथ्य

द्वारा Dr. Gaurav Deka जुलाई 24, 10:44 बजे
अलैंगिक लोगों को अक्सर उनकी यौन रूचि कम होने की वजह से गलत समझा जाता हैI क्या अलैंगिकता का इलाज संभव है? आज हम इस विषय से जुड़े ७ प्रमुख मिथ्यों का सच सामने लाएंगे...

अलैंगिक होने का चुनाव आप खुद करते हैं

समलैंगिकता से जुड़े मिथ्यों की तरह ही लोगों को लगता है कि अलैंगिक होना भी एक विकल्प है जिसे आप खुद चुनते हैंI जबकि ऐसा नहीं हैI अलैंगिक होने का मतलब है आपका किसी के भी प्रति यौनिक रूप से आकर्षित नहीं हो पानाI इस लक्षण को ना ही चुना जा सकता है और ना ही इसे बदला जा सकता हैI आप अलैंगिक हैं तो हैं, इसमें किसी भी तरह का कोई भी भ्रम या जटिलता नहीं हैI

अलैंगिक लोगों को प्यार नहीं होता

अलैंगिकता का अर्थ सिर्फ़ काम वासना में कमी होना हैI इसका यह मतलब कतई नहीं है की अलैंगिक व्यक्ति को प्यार नहीं हो सकताI यह बिलकुल संभव है कि दो अलैंगिक लोगों को एक दूसरे से प्यार हो जाए और वो एक दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस करेंI असल में ऐसे कई अलैंगिक जोड़े हैं जो एक साथ खुश रहते हैं और समलैंगिक और विषमलिंगी जोड़ो की तरह ही सामान्य रूप से जीवन जीते हैंI यह जोड़े बस एक दूसरे के साथ सेक्स करना पसंद नहीं करते और अपने रिश्ते को भी एक सेक्स रहित रिश्ता ही मानते हैंI

अलैंगिकता का मतलब है ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य का अर्थ है कि आप किसी भी तरह की यौनिक क्रिया में भाग नहीं लेते और यह आपका खुद का फैसला होता हैI इसकी कई वजह हो सकती हैI कुछ यह निर्णय धार्मिक कारणों की वजह से लेते हैं जबकि कुछ लोग इससे वैचारिक रूप से दूर रहते हैंI अलैंगिक व्यक्तियों के लिए सेक्स करना या नहीं करने का विकल्प ही नहीं होताI वो ना तो सेक्स के ख़िलाफ़ होते हैं और ना ही वो इससे अपने आपको जानबूझकर वंचित रखते हैंI उनका बस मन ही नहीं करता कि वो किसी भी प्रकार की कामुक क्रिया में सम्मिलित होI

यह एक अस्थायी अवस्था है

काफ़ी लोग यह मानना चाहेंगे कि अलैंगिकता एक अवस्था है जो समय के साथ शायद ठीक हो जाएI कुछ लोगों को लगता है कि अलैंगिक लोग जानबूझकर सेक्स नहीं करने का निर्णय लेते हैंI कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सेक्स करने से या कोई दवाई लेने से अलैंगिकता ठीक हो सकती हैI लेकिन यह सच नहीं हैI अलैंगिकता ना ही कोई अस्थायी अवस्था जो समय के साथ बदल जायेगी और ना ही इसका इलाज संभव हैI यह पूर्ण रूप से स्वाभाविक है और किसी भी और अनुस्थिति की तरह इसमें भी कोई बदलाव नहीं होताI

अलैंगिक लोग कुछ छुपा रहे होते हैं

अलैंगिकता से जुड़ा सबसे प्रमुख मिथ्य है कि शायद यह लोग समलैंगिक होते हैंI या तो यह सामने आने से डरते हैं या फ़िर इन्हे अपने यौनिक रुझान को लेकर किसी तरह का भ्रम होता हैI इसमें से किसी भी बात में कोई सच्चाई नहीं हैI अलैंगिक लोग भी समलैंगिकों और विषमलिंगियों की तरह ही जीते जागते लोग होते हैंI अलैंगिकता हमारे आसपास मौजूद हैI

इनका यौन उत्पीड़न हुआ होगा

यह समझा जाता है कि अलैंगिकों को सेक्स नापसन्द होता है या वो इससे नफरत करते हैं, और एक बार फ़िर इस बात में किसी प्रकार की कोई भी सच्चाई नहीं हैI कई बार लोग अलैंगिकता की वजह पूर्व में हुए किसी यौन आघात को समझ लेते हैंI बाकी लोगों की तरह अलैंगिकों की भी अपनी अलग पहचान होती है और ज़रूरी नहीं कि उस पहचान की वजह अतीत में घटित कोई यौन उत्पीड़न होI यौन शोषण किसी के भी साथ हो सकता है लेकिन यह मान लेना कि यौन शोषण की वजह से कोई व्यक्ति अलैंगिक हो सकता है, एक गलत धारणा हैI

यह लोग सेक्स नहीं कर सकते

बाकी लोगों की तरह अलैंगिकों के जननांग भी पूर्ण रूप से क्रियाशील होते हैंI इन्हें ओर्गास्म भी हो सकता है और यह कमोत्तेजकता भी महसूस कर सकते हैंI यह अच्छी तरह सेक्स करने में भी पूर्ण रूप से सक्षम होते हैं और सच तो यह है कि इनमे से कुछ इसकी कोशिश भी करते हैंI यह याद रखें कि अलैंगिकता का मतलब केवल सेक्स में रूचि की कमी होना है और यौन क्षमता से इसका कोई सम्बन्ध नहीं हैI

क्या आपके पास अलैंगिकता के बारे में और भी मिथ्य हैं? उनके बारे में नीचे टिपण्णी करके हमें बता सकते हैं या फेसबुक पर हमसे संपर्क कर सकते हैंI अगर आपके मन में अलैंगिकता को लेकर किसी भी प्रकार की दुविधा या प्रश्न हो तो कृपया हमारे फोरम जस्ट पूछो में इस बारे में बात करेंI

क्या आप इस जानकारी को उपयोगी पाते हैं?

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