Recovering from teenage abortion
Flickr/Philippe Put

किशोरावस्था गर्भपात से उभरना

द्वारा Gayatri Parameswaran नवंबर 26, 01:06 बजे
‘‘मैं जिन पलों से गुजरी वह अभी भी मेरे दिमाग में ताजा हैं’’, मुंबई की 24 वर्षीय छात्रा का उस समय के बारे में कहना है जब उन्होंने किशोरावस्था में गर्भपात करवाया।प्रेम प्रसंग की वजह से इतना दर्द और आघात पहुंच सकता था, यह उन्हें बहुत अप्रिय रूप से आश्चर्यजनक लगा।

और उसके आस-पास व्याप्त रूढ़ीवादी माहौल ने स्थिति और बदतर कर दी।

‘‘जब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूँ, मेरे प्रेमी किसी जरूरी काम से बाहर गया हुआ था। उसने सहयोग करने का पूरा प्रयास किया लेकिन उसके दृष्टिकोण में, निश्चित रूप से उन परिस्थितियों में हम एक परिवार का भार नहीं उठा सकते थे’’

‘‘हालांकि उसके इस सोच से मुझे दुख हुआ, लेकिन मैं खुद भी इस बारे में नकारात्मक थी। भारत में अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो जाये तो लोग आपको देख कर नाक भौं सिकोड़ते हैं’’

पाबंदी
‘‘अगर मैंने गर्भपात कराने का फैसला ना किया होता तो मेरे लिए परिवार, समाज और कार्य स्थल से निष्काषित हो जाने का खतरा था। आप जानते ही हैं - शादी के बिना संभोग पर प्रतिबंध है’’

‘‘मुझे अच्छी तरह पता था अगर मैंने अपने माता-पिता को बताया तो उन्हें चोट पहुंचेगी। तो मुझे चुपचाप गर्भपात करवा लेना आसान रास्ता लगा। उन्हें अभी तक इसके बारे में मालूम नहीं है’’

सहयोगी
‘‘यद्यपि मेरे पूर्व प्रेमी को कोई भी पूरा नहीं कर सकता था, मेरे कुछ करीबी मित्रों ने बहुत सहारा दिया। मैं उन दिनों पूरे समय उलझन में, सोच में डूबी हुई और भावुक रहती थी। उनकी मदद को मैं जीवन भर नहीं भूल पाउंगी’’
‘‘लेकिन हम सब बहुत छोटे और परिपक्व थे और नहीं जानते थे कि इन परिस्थितियों से कैसे निपटा जाये। मैंने अपने उम्र से बड़े एक मित्र से मार्गदर्शन लिया। उसने डॉक्टर ढूंढने और अभिभावक का रूप निभाने जैसे वास्तविक मसलों का हल किया’’

कुछ खो देने का अहसास
‘‘मुझे याद है कैसे मैंने क्लीनिक के चक्कर लगाये, दुविधापूर्ण प्रश्नों का उत्तर दिया। असामान्यजस्यपूर्ण चिकित्सकों से मिली और खुद सभी जांच करवाई। मुझे अपने अकेले होने से और इसे गुप्त रखना बहुत घृणापूर्वक लगा। उन दिनों मुझे एक ऐसे समाज का हिस्सा होने की प्रबल इच्छा हुई जिस में लोग अधिक खुले विचारों वाले हो।’’

‘‘मुझे गर्भपात के बाद प्राकृतिक रूप से लगा कि मैंने अपना कुछ खो दिया है। अगले कुछ महिनों और वर्षों में भावनात्मक रूप से मैंने भुगता है’’

अपराधबोध
‘‘मुझे यौन क्रिया की सोच से भी घृणा हो गई। जिसकी वजह से मेरे संबंधों में दरार पैदा हो गई। मैं गर्भपात के उस निर्णय के लिए हमेशा अपने आप को दोषी ठहराती रही। मैं डिप्रेशन का शिकार हो गई लेकिन मैंने इलाज की कोशिश नहीं की क्योंकि मुझे लगा कि मैं उसी के लायक थी’’
‘‘मेरे प्रेमी सहज रूप से इस आघात से उबर गया। इससे मुझे लगा कि हमारी सोच समान नहीं थी और हमारी दूरिया बढ़ गई। उस वक्त तो हमने संबंध विच्छेद होने से बचा लिया, लेकिन वो ज्यादा दिन चल नहीं पाया’’

उबरना
‘‘पांच साल बाद मैंने महसूस किया कि मेरी इस मामले को लेकर भावनाएं अभी भी वहीं थी। मेरे एक मित्र के समझाने पर मैंने इलाज करवाने का निर्णय लिया।’’
‘‘डॉक्टर के परामर्श से उबरने की प्रक्रिया शुरू हुई। तब मैंने पूरी घटना को स्वीकार करने की और जो उसके लिए अपने आपको दंडित करने की कोशिश शुरू की। अभी भी मैं पूरी तरह से उस से नहीं उबर पाई हूँ। लेकिन मुझे खुषी है कि मैंने शुरूआत तो की।’’

छायांकन - फिलिक्कर/फिलिप्प पुट

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