Say no to physical or verbal abuse
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वो सबके सामने मुझसे बदतमीज़ी करती थी और हाथ भी उठाती थीI

द्वारा Anonymous जुलाई 26, 12:21 बजे
राकेश को एक लडकी से प्यार हुआ लेकिन जल्द ही उसे पता चल गया कि शायद उसने गलत व्यक्ति का चुनाव कर लिया था। उसे यह कड़वा सच स्वीकार करने मेँ थोडा समय लग गया। आइए जानते हैं कि राकेश ने इस प्रताड़ना से भरे रिश्ते का अंत कैसे किया।

राकेश (परिवर्तित नाम) 25 साल के व्यापारी है जो गोवा में रहते हैI

प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है। मुझे अपने कॉलेज की एक जूनियर से प्यार हो गया। पूरबी (परिवर्तित नाम) मेँ वो सबकुछ था जिसकी मुझे तलाश थी -  वो खूबसूरत थी, स्मार्ट थी और आत्मविश्वास तो जैसे उसमें कूट कूट कर भरा था। कुछ हफ़्तों की मुलाक़ातों के बाद ही हम प्रेम की डोरी में बन्ध गए।

धीमा पर स्थिर

शुरुआत मेँ तो हमारा रिश्ता बिल्कुल सामान्य था, साथ में घूमना फिरना, मजबूत भावनात्मक संबंध और शारीरिक अंतरंगता। कुछ दिनों में हम एक दूसरे के इतने करीब आ गए कि एक दूसरे से दूर रह पाना असंभव लगता था। मुझे लगने लगा कि मैँ दुनिया का सब से संतुष्ट और खुश बॉयफ्रेंड हूँ। लेकिन, मैं गलत था।

धीरे धीरे मैंने अपने रिश्ते मेँ कुछ बदलाव होते देखे। शारीरिक अंतरंगता की जगह झड़प ने लेली, और बेवजह रहने वाली मुस्कराहट की जगह शक और अविश्वास ने। मुझे यह समझने में 2 साल लग गए कि पूरबी के इस बर्ताव के चलते वो मेरी ज़िन्दगी नियंत्रित करने लगी थी। उसने मुझे मौखिक और शारीरिक हिंसा का शिकार बनाया था। बेवजह का गुस्सा, सार्वजानिक जगहों पर हाथ उठा देना अक्सर होने लगा।

पहली घटना

मुझे वो दिन आज भी याद है जब मुम्बई की एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर उसने सबके सामने मुझे थप्पड़ मार दिया। ऐसा पहली बार हुआ थाI ना तो मैंने उस पर पलट कर हाथ उठाया और ना ही कोई प्रतिक्रिया दी। उसे इस बात का गुस्सा था कि मैंने अपनी एक महिला साथी की किसी काम में मदद की थी। उसके इस रूप को देखकर मैं सचमुच बहुत निराश हो गया था।

अगर मैं किसी भी लडकी से बात भी करता था तो उसका नतीजा हमेशा हमारे बीच बहस और लड़ाई ही होता था। वो अक्सर हमारे दोस्तों के बीच मेँ अपमानजनक बातेँ कहकर मुझे शर्मिंदा किया करती थी। यह सब काफी समय तक चलता था और इस का अंत हमेशा पूरबी के द्वारा की जाने वाली शारीरिक हिंसा के साथ ही होता था। उसके इस व्यवहार के डर से मैंने अपनी महिला साथियोँ से बात करना लगभग बंद ही कर दिया था।

इस तरह की लडाई होने के बाद कई दिनोँ तक मैं सिर्फ़ माफी मांगता रहता था और उसे शांत करने की कोशिश मेँ लगा रहता था। मुझसे बात करना तो दूर पूरबी मुझे अपने पास तक नही फटकने देती थी। वो जानबूझ कर हिंसा करती थी। मेरे कुछ दोस्तों ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसके रुख मेँ कोई बदलाव नहीँ आया।

यह लेख अंतरंग साथी के द्वारा की गयी बदसलूकी के खिलाफ हमारे आंदोलन का हिस्सा है #BearNoMore

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