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एल जी बी टी समुदाय के लिए डेटिंग एप्स

द्वारा Harish P मई 21, 12:52 बजे
क्या आप को एक साथी की तलाश है या किसी के साथ डेट पर जाना चाहते हैं? तो रुकिए क्योंकि यह लेख आप ही के लिए हैI इस हफ़्ते हम नज़र डालेंगे भारत की पांच ऐसी डेटिंग एप्स पर जो एल जी बी टी समुदाय के लिए सबसे उपयुक्त हैंI
  1. प्लेनेट रोमियो
    वर्ष 2002 में शुरू हुई प्लेनेट रोमियो विश्वभर के एल जी बी टी समुदाय में बेहद लोक्रपिय हैI मज़ेदार बात यह है कि समूचे विश्व के इसके तीस लाख उपभोक्ताओं में से 92000 भारत में मौजूद हैंI अन्य एप्स के विपरीत प्लेनेट रोमियो में किसी पुरुष से बात करने के लिए आपको भुगतान करके उनकी सदस्यता का संस्करण नहीं लेना पड़ताI
    एक और दिलचस्प बात यह है कि यह एप आपको यह जानकारी भी देती है कि कितने लोग उस व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जिससे आपको हर खाते की असलियत का सही सही अंदाज़ा भी हो जाता हैI इस की एक ही कमी हैI वो यह कि अपनी तस्वीर लगाने में बड़ी समस्या आती है और बहुत समय भी बर्बाद होता हैI
  2. ग्रिन्डर
    दुनिया भर के 192 देशो में फ़ैली हुई ग्रिन्डर एप समलैंगिक और द्विलैंगिक पुरुषों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैI इसके दैनिक उपभोक्ताओं की संख्या करीब बीस लाख से ऊपर हैI अप्रैल 2015 में, ग्रिन्डर ने घोषणा की है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल भारत में उसके उपयोगकर्ताओं में लगभग 50% की वृद्धि हुई है।यह एक बेहद सरल और आसान एप हैI यह आपके स्थान के अनुसार आपको उन पुरुषों से संपर्क स्थापित करने में मदद करती है जो आपके निकट मौजूद हैंI महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आपको उस व्यक्ति की सटीक दूरी के बारे में बताती है और आपको यह भी विकल्प देती है कि आप अपने खाते से अपनी सामाजिक मीडिया प्रोफाइल को जोड़ सकेंI
    हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे  उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सुरक्षा को ख़तरा हो सकता हैI यह आपको अपनी एचआईवी स्थिति को सार्वजनिक करने और एसटीडी पर संसाधनों को पढ़ने के लिए भी एक विकल्प प्रदान करती है। तस्वीर साझा करने से लेकर दिलचस्प खातों को अलग से बुकमार्क करने तक यह पुरुषों को कई तरह के विकल्प देती है, जैसे: सेक्सटिंग, आकस्मिक सेक्स या फ़िर और भी बहुत कुछI दुर्भाग्यवश अगर आप एक ऐसा रिश्ता ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक चले तो उसके लिए ग्रिन्डर सही जगह नहीं हैI

    विभिन्न यौन संचारित रोगों के लक्षणों और संरक्षण के बारे में यहां पढ़ें।
  3. ओके क्यूपिड
    ओके क्यूपिड समलैंगिक पुरुष और महिलाओं के साथ विषमलिंगी महिलाओं और पुरुषों के लिए भी बेहद मददगार हैI 2014 में लिंग पहचान और यौन अभिविन्यास श्रेणियों के तहत इस एप ने अपने विकल्पों का विस्तार किया और उपयोगकर्ताओं को यह अनुमति दी कि वो खुद को परिभाषित कर सकेंI इसके अलावा यह उपयोगकर्ताओं को दिलचस्प प्रश्नोत्तरी, संगतता से जुड़े सवाल, और जोड़ी कैसे बनाये सम्बंधित सुविधाएं भी प्रदान करती हैI
  4. टिंडर
    वैसे तो टिंडर विषमलिंगियो में खासी लोकप्रिय है लेकिन धीरे-धीरे यह एल जी बी टी समुदाय में भी लोकप्रिय होती जा रही है, खासकर के समलैंगिक महिलाओं मेंI हाल ही में टिंडर ने अपनी एप में लिंग के और अधिक विकल्प देने शुरू किये हैं जिससे वो विभिन्न समुदायों की आवश्यकताओं का ध्यान रख सकेंI
    यह एक बेहद अच्छे तरीके से बनाई गयी एप है जिसमें आप सिर्फ़ एक ऊँगली घुमा कर अपने लिए डेट ढूंढ सकते हैंI कुछ अन्य एप्स की तरह यह सिर्फ़ समलैंगिक लोगों के लिए नहीं है लेकिन यह आपको अपनी पसंद बताने का मौका देती है और उसी के आधार पर आपके सामने विकल्प पेश करती हैI
  5. स्क्रफ़
    स्क्रफ़ 2011 से भारत के लोगों के लिए उपलब्ध हैI आज इसके विश्वभर में करीब 10 लाख उपभोक्ता हैंI बाकी एप्स के विपरीत यह समलैंगिक और द्विलैंगिक पुरुषों को अपने आसपास के और दूर बैठे लोगों को चुनने का मौक़ा एकसाथ देती हैI यह यात्रियों के लिए दिलचस्प सुविधाओं प्रदान करती है। इसमें मौजूद उद्यम विकल्प आपको लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर मौजूद उपभोक्ताओं पर नज़र डालने और उनसे बात करने का मौक़ा देता हैI
    यह ना सिर्फ़ आप को अपना विकल्प चुनने के लिए प्रोफाइल स्वाइप करने के लिए अनुमति देता है, बल्कि यह आपके मुखपृष्ठ पर भी वही प्रोफाइल देता है जिन्हें इस एप ने आपकी पसंद के आधार पर चुना होता हैI आप यहाँ किसी स्थानीय समुदाय का हिस्सा बनकर स्थानीय कार्यक्रमो में भी शामिल हो सकते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से सन्देश भेज सकते हैंI

यह सारे एप आई फ़ोन और एंड्रॉइड फोनों पर मुफ़्त में डाउनलोड की जा सकती हैंI

आपकी सबसे पसंदीदा एप कौनसी है? अपने अनुभव नीचे लिखें या फेसबुक के ज़रिये हमसे संपर्क करेंI अगर आपके मन में कोई निजी सवाल हो तो आप हमारे चर्चा मंच का हिस्सा बन उसका जवाब हासिल कर सकते हैंI

लेखक के बारे में: मुंबई के हरीश पेडाप्रोलू एक लेखक और अकादमिक है। वह पिछले 6 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। वह शोध करने के साथ साथ, विगत 5 वर्षों से विश्वविद्यालय स्तर पर दर्शनशास्त्र भी पढ़ा रहे हैं। उनसे लिंक्डइन, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर संपर्क किया जा सकता है।

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