Sex determination
Samuel Borges photography/Love Matters

'मेरा तलाक़ हो गया क्यूंकि मुझे बेटी हुई'

द्वारा Roli Mahajan सितम्बर 11, 04:14 बजे
“हमारी शादी को पांच साल हो गए थे और परिवार कि तरफ से बच्चा पैदा करने का दबाव हमारे रिश्ते पर असर दाल रहा था। लेकिन जब मैं गर्भवती हुई, तो मेरे पाई ने मुझे छोड़ दिया क्यूंकि मुझे बेटी होने वाली थी," ऐसा प्रीत का कहना है।

प्रीत 36 वर्षीय टीचर है और शिमला में रहती है।

मेरे पति अपने परिवार मैं एकलौते बच्चे थे, इसलिए जहाँ कहीं भी हम जाते, उसके परिवार वाले और रिश्तेदार हमसे यही सवाल करते कि हम बच्चा कब करेंगे। मुझे अक्सर ये ज्ञान दिया जाता कि ज़यादा देरी कर देने कि वजह से मेरी उर्वरता का समय निकल जायेगा इसलिए हमे बच्चा जल्दी करना चाहिए।

हम अक्सर लोगों कि सलाह पर ज़यादा ध्यान नहीं देते थे। लेकिन जब उसकी माँ ने बच्चा करने कि बात पर दबाव डालना शुरू किया तो बात अलग थी। हमें  एक साल से बच्चा करने कि कोशिश तो कर ही रहे थे लेकिन जब -जब उसकी माँ इस बात पर दबाव डालती तो हमारे बीच झगड़ा हो जाता था।

बच्चा होने का इंतज़ार 

हमारी शादी के छटे साल में, मैं गर्भवती हो गयी। मैं बहुत खुश थी और मेरे पति भी। ऐसा लगता था जैसे शायद बच्चा ना होना ही केवल हमारी शादी-शुदा ज़िन्दगी कि परेशानी थी। और अब जब मैं गर्भवती हो गयी थी, तो हैम फिर खुशनुमा पति-पत्नी बन गए थे।

जैसे- जैसी खबर फैली, हर कोई, हमारे रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्त - बच्चे का लिंग जानना चाहते थे। मैं सिर्फ यही सोचती थी,"इससे क्या फर्क पड़ेगा? मैं माँ बनने वाली हूँ और मेरे लिए यही काफी है।" लेकिन मेरे पति मुझे कहते रहे, "लड़का ही होगा, देख लेना - लड़का!"

बहरापन

मैंने उससे पुछा कि वो ऐसा क्यूँ कह रहा था। उसने जवाब दिया, "बस मुझे पता है। आखिर मुझ में कुछ कमी थोड़ी ना है जो मुझे लड़का नहीं होगा। लड़का मेरा खानदान का नाम आगे लेकर जायेगा, हमारा परिवार पूरा करेगा और मेरे ऊपर कोई नपुंसक होने कि ऊँगली भी नहीं उठा पायेगा। और हमें दूसरा बच्चा करने के बारे में चिंता भी नहीं पड़ेगी।" मुझे उसकी बातें सुनकर जैसे सदमा सा लग गया।

मैंने सोचा कि अपनी सास से इस बारे में बात करूँ ताकि वो मेरे पति के दिमाग से यह बकवास निकाल सके, लेकिन फिर पता चला कि वो खुद पोते कि चाहत में पागल हो रही थी। मैंने काफी बार यह बताने कि कोशिश करी सबको कि मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़का हो या लड़की लेकिन मेरी बात जैसे अनसुनी कर दी गयी। जैसे सब बेहरे हो गए हों। मुझे शायद अंदाज़ा लगा लेना चाहिए था कि आगे क्या होगा लेकिन मैं ऐसा नहीं किया और फिर हमारी शादी ने नया मोड़ लिया।

बड़ी परीक्षा

जैसे ही मौका लगा, मेरे पति ने मेरे बच्चे का लिंग पता करने के लिए डॉक्टर से बात करी और मुझे प्राइवेट अस्पताल लेकर गए। मुझे इस बारे में बताया गया और जब मुझे पता चला तो मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं क्या करूँ। उनके लिए बच्चे का लिंग जानना ज़रूरी क्यूँ था? मैं अपने पति को खुश रखना चाहती थी और मुझे खुद ऐसा लगने लगा था जैसे कि अगर मुझे लड़का होगा तो मैं एक अच्छी पति, एक अच्छी बहु और एक अच्छी महिला साबत हो जाउंगी। मैं मन ही मन भगवान् से बेटा होने कि खबर मांग रही थी।

ऐसा लगा जैसे मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा इम्तेहान था, जिसकी मैंने कुछ तयारी नहीं करी थी लेकिन जिसके परिणाम पर मेरी ज़िन्दगी टिकी थी। जब भी घर के दरवाज़े कि घंटी बजती, या फ़ोन कि घंटी, तो मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगता। मुझे आज भी वो शाम याद है जब मेरे पति को परिणाम बताया गया। वो बहुत उदास होकर घर आये जैसे उनकी ज़िन्दगी ख़त्म हो गयी हो। वो सीधा हमारे कमरे में गए, दरवाज़ा बंद किया और फूट-फूट कर रोने लगे। वो दुखी थे और बहुत गुस्से में भी।

अंत कि शुरुवात

हमने एक-दूसरे से काफी दिनों तक कुछ बात नहीं करी, उसकी माँ के ताने बढ़ने लगे और कड़वे भी होने लगे और किसी ने भी मेरे हाथ का खाना खाना बंद कर दिया। मुझे बात करनी भी बंद कर दी सबने। मेरे पति ने मेरे साथ सोना भी छोड़ दिया। मैं जैसे बिलकुल अलग कर दी गयी थी।

कुछ दिनों बाद, मेरे पति ने अपनी माँ से कहा कि वो मुझे मेरे मायके जाने के लिए कहें। वो मुझसे मिलने भी नहीं आये और जब मुझे बेटी हुई तब भी मिलने नहीं आये। ना ही फ़ोन किया। जिस महीने मुझे प्यारी सी बेटी हुई उसी महीने मेरे पति ने मुझे तलाक़ के कागज़ भेजे।

नयी ज़िन्दगी

मेरी बच्ची आज नौ साल कि हो गयी है। मैं एक पास के स्कूल में पढ़ाती हूँ और हम दोनों अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत खुश हैं। मुझे उस वक़्त बहुत तकलीफ हुई थी जब मेरे पति ने मुझे छोड़ा था लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि मेरे पति मुझसे प्यार करते ही नहीं थे। उन्हें मुझसे सिर्फ एक लड़का चाहिए था।

हाँ, मेरे माता-पिता के सहयोग से और अपनी बच्ची के प्यार कि वजह से मैं इस दुःख से उभर पायी। अब मुझे ऐसा लगता है कि अच्छा ही हुआ कि मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया। आखिर अब मेरी बच्ची को ऐसा कभी नहीं लगेगा कि उसके आने से लोगों को तकलीफ थी।

क्या आपको लगता है कि प्रीत के पति ने उसको छोड़ कर सही कुया क्यूंकि उसे बेटी होने वाली थी? प्रीत को क्या करना चाहिए था? अपने जवाब यहाँ लिखिए या फेसबुक पर हो रही चर्चा में हिस्सा लीजिये।

क्या आप इस जानकारी को उपयोगी पाते हैं?

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