G-spot क्या है?
कहा जाता है कि योनि के अंदर, आगे के हिस्से में करीब 4–5 सेंटीमीटर अंदर एक खास संवेदनशील जगह होती है, जिसे G-spot कहा जाता है। कुछ महिलाओं के लिए यह जगह ज्यादा प्लेज़र का कारण बन सकती है।
हालांकि वैज्ञानिक अब तक यह पूरी तरह साबित नहीं कर पाए हैं कि G-spot कुछ अलग हिस्सा है क्योंकि जब शरीर की जांच की गई, तो कोई अलग “G-spot” अंग साफ तौर पर नहीं मिला। वहां सिर्फ कुछ टिश्यू और छोटी ग्रंथियां (Skene’s glands) पाई गईं इसलिए अभी कुछ खास कहा नहीं जा सकता लेकिन हां, अगर तुम्हें किसी खास हिस्से में प्लेजर महसूस होता है, तब तुम उसे खुलकर महसूस करो और अपने पार्टनर को भी बताओ।
वहां महसूस क्या होता है?
ऐसा हो सकता है कि उस हिस्से में कुछ खास तरीके से तुम्हें संवेदना महसूस हो, तो इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं-
- Skene’s glands का रोलः ये छोटी ग्रंथियां पुरुषों के प्रोस्टेट जैसी मानी जाती हैं और तरल बना सकती हैं।
- क्लिटोरिस से जुड़ावः क्लिटोरिस सिर्फ बाहर दिखने वाला छोटा हिस्सा नहीं है बल्कि ये अंदर तक फैला होता है और बहुत संवेदनशील होता है। जब योनि के अंदर आगे के हिस्से पर दबाव पड़ता है, तो क्लिटोरिस में भी संवेदना हो सकती है।
तो सच क्या है?
- आज भी यह साफ नहीं है कि G-spot एक अलग अंग है या नहीं
- कई लोग मानते हैं कि यह अलग-अलग हिस्सों के मिलकर काम करने से मिलने वाला अनुभव है
अब असल बात फिलहाल कहीं नहीं जा सकती क्योंकि अभी इस पर साइंस भी कुछ खास नहीं कह पाया है।
सबसे जरूरी बात
हर महिला का शरीर अलग होता है। किसी को G-spot से आनंद मिलता है, तो किसी को नहीं और दोनों ही बिल्कुल सामान्य हैं। ये समझना जरूरी है कि प्लेजर या आनंद पाने का कोई एक “सही तरीका” नहीं होता है। साथ ही हर किसी के सेक्स को इंज्वॉय करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। किसी को गर्दन पर छूने से चूमने से अच्छा लगता है, तो किसी को योनि के हिस्से को सहलाने से इसलिए इसे केवल G-spot से जोड़ना गलत है।
इससे भी ज्यादा जरूरी है कि सेक्स के समय दोनों पार्टनर्स में सहमति हो, दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को समझें और सेक्स को एक परीक्षा के तरह नहीं बल्कि एक खास पल समझें।
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