Periods
© Love Matters | Rita Lino

मासिक चक्र

हर महिला को किशोरावस्था में पहुँचने के बाद माहवारी (मासिक चक्र) शुरू होती है। पढ़िए यह कैसे होता है, इससे महिला के शरीर में क्या बदलाव आते हैं, और बहुत कुछ...

यह कैसे काम करता है?

जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुँचती है तब उनके अंडाशय इस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन उत्पन्न करने लगते हैं। इन हार्मोन की वजह से हर महीने में एक बार गर्भाशय की परत मोटी होने लगती है और वह गर्भ धारण के लिए तैयार हो जाता है।

इसी बीच कुछ अन्य हार्मोन अंडाशय को एक अनिषेचित डिम्ब उत्पन्न एवं उत्सर्जित करने का संकेत देते हैं। अधिकतर लड़कियों में यह लगभग 28 दिनों के अन्तराल पर होता है।

 

 

निषेचन का न होना = मासिक धर्म होना

सामान्यतः, यदि लड़की डिम्ब के उत्सर्जन (अंडाशय से डिम्ब का निकलना) के आसपास यौन संबंध नहीं बनाती हैं, तो किसी शुक्राणु की डिम्ब तक पहुँच कर उसे निषेचित करने की संभावनाएं नहीं रह जाती हैं। अतः गर्भाशय की वह परत जो मोटी होकर गर्भावस्था के लिए तैयार हो रही थी, टूटकर रक्तस्राव के रुप में बाहर निकल जाती है। इसे मासिक धर्म कहते हैं।

मासिक धर्म शुरु ही हुआ हो

यदि किसी लड़की का मासिक धर्म अभी ही शुरु हुआ हो, तो हो सकता है उनमें अभी डिम्ब का उत्सर्जन न हो रहा हो। शरीर अपरिपक्व होने पर उसे गर्भावस्था से बचाने का यह प्राकृतिक तरीका है।

मासिक धर्म शुरु होने के पहले साल में केवल 20 प्रतिशत बार डिम्ब का उत्सर्जन होता है।

मासिक धर्म होने के पहले वर्ष में, एक डिम्ब पाँच में से एक ही बार उत्सर्जित हो सकता है। जब तक आपका मासिक धर्म होते हुए 6 साल हो जाएंगें, तब हर दस में से नौ बार डिम्ब का उत्सर्जन होगा।
यह ध्यान रखना चाहिए की हर लड़की अलग होती हैं और एक बार जब वे यौन रुप से परिपक्व हो जाती हैं, वे गर्भवती हो सकती हैं। यदि उनका मासिक धर्म अभी शुरु न हुआ हो तो भी वे गर्भवती हो सकती हैं। यह ना सोचिए की यदि आपका मासिक धर्म देर से शुरु हो तो गर्भनिरोधक का प्रयोग ज़रुरी नहीं है। यह एक बड़ी गलती साबित हो सकती है!

गर्भधारण

लड़कियाँ एवं महिलाएँ अपने जीवन के एक निश्चित अवधि में ही गर्भधारण कर सकती हैं। ज़्यादातर लड़कियों एवं महिलाओं में यह 15 से 49 वर्ष की आयु के बीच होता है, जब उनका मासिक धर्म हो रहा हो और उनमें नियमित रुप से डिम्ब का उत्सर्जन हो रहा हो।

ज़्यादातर लड़कियों एवं महिलाओं में, दो मासिक धर्म के बीच, हर माह डिम्ब का उत्सर्जन होता है। डिम्ब के उत्सर्जन में एक अनिषेचित डिम्ब, किसी एक अंडाशय से निकल कर, डिम्बवाही नलिका (फैलोपियन ट्यूब्स) से होता हुआ गर्भाशय की ओर पहुँचता है।

Ovaries

गर्भधारण के लिए, डिम्ब के उत्सर्जन के आस पास, इससे लगभग 5 दिन पहले और 1 दिन बाद तक, किसी पुरुष के साथ सेक्स किया जा सकता है। सेक्स के बाद शुक्राणु तैर कर योनि से होते हुए डिम्बवाही नली तक पहुँचते हैं। यदि डिम्बवाही नली में केई अनिषेचित डिम्ब हो तो यह शुक्राणु डिम्ब में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। यदि एक शुक्राणु डिम्ब में प्रवेश कर जाता है तब डिम्ब निषेचित हो जाता है।

निषेचित डिम्ब फि़र डिम्बवाही नली से होता हुआ गर्भाशय में पहुँचता है। हार्मोन यह निश्चित करते हैं की गर्भाशय की दीवार निषेचित डिम्ब को ग्रहण करने के लिए तैयार रहे। यदि यह डिम्ब गर्भाशय की दीवार से चिपक जाता है तो आप गर्भवती हो जाती हैं

डिम्ब का उत्सर्जन

Phases of ovarian cycle

चरण 1: मासिक धर्म (पहले दिन से पाँचवें दिन तक)

चक्र के पहले दिन गर्भाशय की परत के ऊतक, रक्त व अनिषेचित डिम्ब योनि के रास्ते शरीर के बाहर आने लगते हैं। यह मासिक धर्म कहलाता है। 28 दिनों के मासिक चक्र में यह चरण 1 से 5 दिनों तक रहता है। पर यदि किसी का मासिक धर्म 2 दिन जितना छोटा हो या 8 दिन जितना बड़ा, तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। यह सामान्य है।

चरण 2: कूपिक (फ़ालिक्युलर ) (छठे दिन से चैदहवें दिन तक)

मासिक धर्म के ख़त्म होते ही गर्भाशय की परत मोटी होना शुरू हो जाती है। और दोनों में से एक अंडाशय, एक परिपक्व अनिषेचित डिम्ब का उत्पादन करता है। इस समय योनि में होने वाले स्राव में भी बदलाव महसूस किया जा सकता है। यह ज़्यादा चिपचिपा, सफ़ेद, दूधिया या धुंधला हो सकता है। यह बदलाव इस बात का संकेत हो सकते हैं की आप महीने के उर्वरक समय में प्रवेश कर रही हैं।

डिम्ब उत्सर्जन के ठीक पहले योनि स्राव का रंग एवं बनावट कच्चे अण्डे के सफ़ेद भाग के जैसा हो सकता है। यह स्राव चिकना एवं पारदर्शक हो सकता है जो शुक्राणु को डिम्ब तक पहुँचने में मदद करता है। मासिक धर्म चरण की तरह ही यह चरण भी 7 दिनों जितना छोटा या 19 दिनों जितना बड़ा हो जाता है।

चरण 3: डिम्ब का उत्सर्जन (ओव्यूलेषन) (चैदहवाँ दिन)
डिम्ब के उत्सर्जन में अंडाशय एक परिपक्व अनिषेचित डिम्ब का उत्सर्जन करता है जो डिम्बवाही नली में पहुँचता है। डिम्ब के उत्सर्जन के समय कुछ लड़कियाँ एवं महिलाएँ पेट या निचली पीठ के एक तरफ़ हल्का दर्द महसूस कर सकती हैं। यह भी पूरी तरह सामान्य है।

डिम्ब का उत्सर्जन मासिक धर्म के पहले दिन के लगभग 14 दिन बाद होता है। इसी बीच आपके गर्भाशय की परत और मोटी हो जाती है।

डिम्ब उत्सर्जन क लक्षण
कुछ लड़कियों एवं महिलाओं को डिम्ब उत्सर्जन के समय कुछ वदलाव महसूस हो सकते हैं-

 

  • योनि स्राव में बदलाव
  • पेट के एक ओर अल्पकालीन या हल्का दर्द
  • सेक्स की इच्छा का बढ़ना
  • पेट का फ़ूलना
  • दृष्टी, गंध या स्वाद के लिए गहरी समझ

चरण 4. डिम्ब उत्सर्जन से मासिक धर्म (पंद्रहवें दिन से अट्ठाइसवें दिन तक)
उत्सर्जित डिम्ब डिम्बवाही नली से होता हुआ गर्भाशय तक पहुँचता है। गर्भाशय की परत डिम्ब को ग्रहण करने के लिए अधिक मोटी हो जाती है। यदि शुक्राणु द्वारा डिम्ब का निषेचन नहीं होता है तो वह नश्ट हो जाता है। शरीर गर्भाशय की परत एवं डिम्ब को बाहर निकाल देता है और आपका मासिक धर्म शुरु हो जाता है।
यदि डिम्ब का निषेचन हो जाता है और वह गर्भाशय की दीवार से चिपक जाता है और आपका मासिक धर्म नहीं होता है तो इसका अर्थ है लड़की या महिला गर्भवती हैं। अब मासिक चक्र बच्चे के जन्म तक बंद हो जाता है।

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Mem plz meri hlp kr dijiye ap mai or mere husbnd bht preshan hai kyunki hame koi baby nhi ho rha hai or hmari shadi ko pura ek saal ho gy h or meri date bhi thik nhi ati mahine me 2 br aa jati h kbi bht jyada bleeding ati hai or kbi bht kum hmne bht treatmnt bhi karwaya or abi bhi krwa rhe h pr thik nhi ho rha hai dr. Bolte hai ki paet pr sujan pr wo hut nhi rhi h itni dwai khane k bd bhi or mjh safed pani bht aata h. Mai ky karu ap plz mjh btaye plz meri help kar dijiye meri age 23 years jai. Plz hlp me
Dear Mam 4-5 month se mere period unbalance h blood niymit roop se nhi aata pet me aur sir me dard hota h pairo me thakawat feel hoti h ,main bahut weekness feel karti hu plz mam koi upay bataiye.meri age 17 h jabki aaj tak main koi sexual relation nhi banaye...
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