Front cover of a romance novel
Pete / Flickr

रूमानी उपन्यास का महिलाओं के यौन जीवन पर बुरा असर

द्वारा Sarah Moses नवंबर 15, 03:12 बजे
रूमानी उपन्यास काफी रिश्तों में तनाव की वजह हैं, मानव संबंधों की मनोवैज्ञानिक सुसन कुइल्लम का यह मानना है।पश्चिमी देशों में बिकने वाली कुल किताबों में करीब आधी किताबें यही होती हैं।

इस किताबों की सुनहरे बालों वाली राजकुमारियां और नौजवान राजकुमार हमें गुदगुदाते तो हैं।

लेकिन उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है।महिलाओं की असल जीवन में भी ऐसी प्रेम कहानियों की उम्मीद टूटे हुए दिलों का शब्द बनती जा रही हैं, ऐसा ब्रिटिश लेखिका का कहना है।

वास्तविकता
‘‘उसने अपने मर्दाना बाहों  में उसे जकड़ लिया और अपने होठों को उसके होठों से छुआ....’’ कुइल्लम ने महिलाओं के रूमानी उपन्यासों में लिखी जाने वाली भाषा  का उल्लेख अपने हाल ही के एक लेख परिवार नियोजन और सुरक्षित संबंध एवं सेक्स में किया।

सपनों की दुनिया के इन उपन्यासों में राजकुमारी को अपने सपनों का राजकुमार मिलता है, और वो अपना कौमार्य उस पर न्यौछावर करते हुए बिना कंडोम के संभोग का भरपूर आनंद उठाते हैं। बदकिस्मती से असल जीवन में ऐसा संभव नहीं हो पाता।

इन उपन्यासो में जो आदर्शवाद और त्रुटिहीन प्यार दिखाया जाता है वो स्वस्थ्य और सुरक्षित संभोग और संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं होता। ‘‘संभोग अद्भुत और संबंध सुखमय तो हो सकते हैं, लेकिन आदर्शवाद की उम्मीद रखना अक्सर निराशा की ओर ले जात है।,’’ कुइल्लम लिखती हैं।

रूमानी उपन्यास
इन उपन्यासों से अलग, असल जीवन में अक्सर महिलाएं अपने पहले संभोग को सबसे अच्छा संभोग ना महसूस कर पायें, लिंग के प्रवेश करने से शायद उन्हें चरम आनंद भी प्राप्त ना हो और उन के दिमाग में अनचाहे गर्भ और सेक्स सवंमित रोगों का खौफ हो, ऐसा संभव है।

इन उपन्यासों के पाठक महिने में 30 उपन्यास पढ़ के उनमें लिखी बातों के आधार पर सेक्स की जानकारी अर्जित कर लेते हैं। इसका बुरा असर उनके तर्क संगत निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है, क्योंकि वो सपनों की दुनिया की कहानी से अपने जीवन की तुलना करने लगते हैं।

सबसे अच्छी सलाह
इन उपन्यासों के प्रशंसक अपने नये प्रेमी के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने में सक्षम हैं क्योंकि उनकी पढ़ाई कहानियों में अक्सर दीवानगी के उस पल में अक्सर कंडोम का जि़क्र नहीं होता। यह भी संभव है कि वो परित्याग की भावना में लिप्त हो कर गर्भ निरोधक का प्रयोग ना करें क्योंकि उनकी कहानियों के अनुसार यही सच्चा प्रेम है, और वो अपने साथी की इच्छा के लिए गर्भ धारण कर लें।

जब एक महिला सपनों की इन कहानियों और वास्तविक जीवन के बीच की लकीर को मिटाने का प्रयास करती है तो कुइल्लम के अनुसार वो अनजाने में मुसीबत की ओर बढ़ रही है। ‘‘उपन्यास छोड़ों और सच अपनाओ,’’ कभी कभी यही सबसे अच्छी सलाह है, उनका मानना है।

प्यार और रिश्तों के बारे में और कहानियां पढ़ें।

क्या रूमानी उपन्यास पर चेतावनी लिखी होनी चाहिए - ये आपके वास्तविक जीवन के रिश्तों को हानि पहुंचा सकते हैं? आपका क्या सोचना है ?
 

इस किताबों की सुनहरे बालों वाली राजकुमारियां और नौजवान राजकुमार हमें गुदगुदाते तो हैं।

लेकिन उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है।महिलाओं की असल जीवन में भी ऐसी प्रेम कहानियों की उम्मीद टूटे हुए दिलों का शब्द बनती जा रही हैं, ऐसा ब्रिटिश लेखिका का कहना है।

वास्तविकता
‘‘उसने अपने मर्दाना बाहों  में उसे जकड़ लिया और अपने होठों को उसके होठों से छुआ....’’ कुइल्लम ने महिलाओं के रूमानी उपन्यासों में लिखी जाने वाली भाषा  का उल्लेख अपने हाल ही के एक लेख परिवार नियोजन और सुरक्षित संबंध एवं सेक्स में किया।

सपनों की दुनिया के इन उपन्यासों में राजकुमारी को अपने सपनों का राजकुमार मिलता है, और वो अपना कौमार्य उस पर न्यौछावर करते हुए बिना कंडोम के संभोग का भरपूर आनंद उठाते हैं। बदकिस्मती से असल जीवन में ऐसा संभव नहीं हो पाता।

इन उपन्यासो में जो आदर्शवाद और त्रुटिहीन प्यार दिखाया जाता है वो स्वस्थ्य और सुरक्षित संभोग और संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त नहीं होता। ‘‘संभोग अद्भुत और संबंध सुखमय तो हो सकते हैं, लेकिन आदर्शवाद की उम्मीद रखना अक्सर निराशा की ओर ले जात है।,’’ कुइल्लम लिखती हैं।

रूमानी उपन्यास
इन उपन्यासों से अलग, असल जीवन में अक्सर महिलाएं अपने पहले संभोग को सबसे अच्छा संभोग ना महसूस कर पायें, लिंग के प्रवेश करने से शायद उन्हें चरम आनंद भी प्राप्त ना हो और उन के दिमाग में अनचाहे गर्भ और सेक्स सवंमित रोगों का खौफ हो, ऐसा संभव है।

इन उपन्यासों के पाठक महिने में 30 उपन्यास पढ़ के उनमें लिखी बातों के आधार पर सेक्स की जानकारी अर्जित कर लेते हैं। इसका बुरा असर उनके तर्क संगत निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है, क्योंकि वो सपनों की दुनिया की कहानी से अपने जीवन की तुलना करने लगते हैं।

सबसे अच्छी सलाह
इन उपन्यासों के प्रशंसक अपने नये प्रेमी के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने में सक्षम हैं क्योंकि उनकी पढ़ाई कहानियों में अक्सर दीवानगी के उस पल में अक्सर कंडोम का जि़क्र नहीं होता। यह भी संभव है कि वो परित्याग की भावना में लिप्त हो कर गर्भ निरोधक का प्रयोग ना करें क्योंकि उनकी कहानियों के अनुसार यही सच्चा प्रेम है, और वो अपने साथी की इच्छा के लिए गर्भ धारण कर लें।

जब एक महिला सपनों की इन कहानियों और वास्तविक जीवन के बीच की लकीर को मिटाने का प्रयास करती है तो कुइल्लम के अनुसार वो अनजाने में मुसीबत की ओर बढ़ रही है। ‘‘उपन्यास छोड़ों और सच अपनाओ,’’ कभी कभी यही सबसे अच्छी सलाह है, उनका मानना है।

प्यार और रिश्तों के बारे में और कहानियां पढ़ें।

क्या रूमानी उपन्यास पर चेतावनी लिखी होनी चाहिए - ये आपके वास्तविक जीवन के रिश्तों को हानि पहुंचा सकते हैं? आपका क्या सोचना है ?
 

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