18 + के लिए उचित

वो सबके सामने मुझसे बदतमीज़ी करती थी और हाथ भी उठाती थीI

Say no to physical or verbal abuse
राकेश को एक लडकी से प्यार हुआ लेकिन जल्द ही उसे पता चल गया कि शायद उसने गलत व्यक्ति का चुनाव कर लिया था। उसे यह कड़वा सच स्वीकार करने मेँ थोडा समय लग गया। आइए जानते हैं कि राकेश ने इस प्रताड़ना से भरे रिश्ते का अंत कैसे किया।

राकेश (परिवर्तित नाम) 25 साल के व्यापारी है जो गोवा में रहते हैI

प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है। मुझे अपने कॉलेज की एक जूनियर से प्यार हो गया। पूरबी (परिवर्तित नाम) मेँ वो सबकुछ था जिसकी मुझे तलाश थी -  वो खूबसूरत थी, स्मार्ट थी और आत्मविश्वास तो जैसे उसमें कूट कूट कर भरा था। कुछ हफ़्तों की मुलाक़ातों के बाद ही हम प्रेम की डोरी में बन्ध गए।

धीमा पर स्थिर

शुरुआत मेँ तो हमारा रिश्ता बिल्कुल सामान्य था, साथ में घूमना फिरना, मजबूत भावनात्मक संबंध और शारीरिक अंतरंगता। कुछ दिनों में हम एक दूसरे के इतने करीब आ गए कि एक दूसरे से दूर रह पाना असंभव लगता था। मुझे लगने लगा कि मैँ दुनिया का सब से संतुष्ट और खुश बॉयफ्रेंड हूँ। लेकिन, मैं गलत था।

धीरे धीरे मैंने अपने रिश्ते मेँ कुछ बदलाव होते देखे। शारीरिक अंतरंगता की जगह झड़प ने लेली, और बेवजह रहने वाली मुस्कराहट की जगह शक और अविश्वास ने। मुझे यह समझने में 2 साल लग गए कि पूरबी के इस बर्ताव के चलते वो मेरी ज़िन्दगी नियंत्रित करने लगी थी। उसने मुझे मौखिक और शारीरिक हिंसा का शिकार बनाया था। बेवजह का गुस्सा, सार्वजानिक जगहों पर हाथ उठा देना अक्सर होने लगा।

पहली घटना

मुझे वो दिन आज भी याद है जब मुम्बई की एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर उसने सबके सामने मुझे थप्पड़ मार दिया। ऐसा पहली बार हुआ थाI ना तो मैंने उस पर पलट कर हाथ उठाया और ना ही कोई प्रतिक्रिया दी। उसे इस बात का गुस्सा था कि मैंने अपनी एक महिला साथी की किसी काम में मदद की थी। उसके इस रूप को देखकर मैं सचमुच बहुत निराश हो गया था।

अगर मैं किसी भी लडकी से बात भी करता था तो उसका नतीजा हमेशा हमारे बीच बहस और लड़ाई ही होता था। वो अक्सर हमारे दोस्तों के बीच मेँ अपमानजनक बातेँ कहकर मुझे शर्मिंदा किया करती थी। यह सब काफी समय तक चलता था और इस का अंत हमेशा पूरबी के द्वारा की जाने वाली शारीरिक हिंसा के साथ ही होता था। उसके इस व्यवहार के डर से मैंने अपनी महिला साथियोँ से बात करना लगभग बंद ही कर दिया था।

इस तरह की लडाई होने के बाद कई दिनोँ तक मैं सिर्फ़ माफी मांगता रहता था और उसे शांत करने की कोशिश मेँ लगा रहता था। मुझसे बात करना तो दूर पूरबी मुझे अपने पास तक नही फटकने देती थी। वो जानबूझ कर हिंसा करती थी। मेरे कुछ दोस्तों ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसके रुख मेँ कोई बदलाव नहीँ आया।

यह लेख अंतरंग साथी के द्वारा की गयी बदसलूकी के खिलाफ हमारे आंदोलन का हिस्सा है #BearNoMore

बद से बदतर

जल्दी ही ये लड़ाईयां हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गयीं। इन लड़ाइयों को शांत करने के लिए एक दिन मैंने उसे अपने घर में मेरे साथ कुछ समय गुजारने को कहा। लेकिन फिर एक बार वही हुआ, कुछ देर बाद वो फिर गुस्से में थी और मुझे अपमानित कर रही थी। इस बहस के दौरान बात इतनी बढ़ गई कि वो रसोई की तरफ भागी और एक चाकू लेकर आई। उसने अपना हाथ काट दिया और मुझे भी चोट पहुंचाने की धमकी दी। मैंने तुरंत अपने माता पिता को बुलाया ओर उनकी मदद मांगी।

ये नज़ारा देखकर कर मेरे माता पिता के होश उड़ गए और उन्होंने मुझे तुरंत इस लडकी के साथ संबंध खत्म करने को कहा। मैं अब भी उस से प्यार करता था लेकिन मुझे दुस्वप्न जेसे इस संबंध का अंत करना ही था। कई दिनोँ के तनाव के बाद मैंने पूरबी से बात करने की हिम्मत की। मैं कोई तमाशा  नहीँ खड़ा करना चाहता था, बस शांति से उससे बात करना चाहता था।

सच का सामना

मैँ उससे मिलने एक कॉफी शॉप मेँ गया। मेरे पहुँचते ही उसका गुस्सा फिर शुरु हो गया क्योंकि मैँ कुछ देर से पहुंचा था। उसने मुझ पर चिल्लाना शुरु कर दिया। उस के बर्ताव की आशंका के चलते मैंने अपने कुछ दोस्तोँ को भी वहाँ आने को कहा था। उसने मेरे इन दोस्तो को भी जमकर भला बुरा कहा। अंत मेँ मैंने उसे बता दिया कि मैं अब इस रिश्ते को और आगे नहीँ बढ़ा सकता। यह सुन कर वो गुस्से से तिलमिला उठी

मेरे दोस्त बिल्कुल सजग थे और ये सुनिश्चित कर रहे थे कि मेरे और पूरबी के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहे। मैं फैसला कर चुका था कि अब उसका कोई पैंतरा नहीँ चलने दूंगा और इस प्रताड़ना को हमेशा के लिए खत्म कर दूंगा। मैं इस रिश्ते मेँ सहज और खुश नहीँ था। तनाव के चलते मैं कुछ बीमार भी महसूस करने लगा था और इसलिए शायद इसे ख़त्म कर देना जरुरी था।

मेरे ब्रेकअप के तुरंत बाद मैं मुंबई छोड़ कर गोवा मेँ रहने लगा। मेरी जिंदगी अब पहले से बेहतर हो रही हैे और मुझे खुशी है कि मेरे साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ मैं खड़ा हो सका।

क्या आपकी गर्लफ्रेंड ने कभी आपको प्रताड़ित किया है? अपने अनुभव नीचे टिप्पणी कर के या फ़िर फेसबुक के ज़रिये हमें बताएंI