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पहली बार: "एक बड़ा डरावना रहस्य"

first period
"उसे लगा मुझे चोट लग गयी थी, पैर या कही और कट गया था। मैं भी ढूँढने लगी की आखिर चोट लगी कहाँ है लेकिन कुछ दिखा ही नहीं।" 12 साल की ऊष्मा अपने दोस्तों के साथ बाहर खेल रही थी। तभी उसके एक दोस्त ने उसकी स्कर्ट पर बड़ा सा लाल धब्बा देखा।

यह लेख 'पहली बार' व्यक्तिगत कहानियां श्रंखला का पहला लेख है।

घबराहट

"मुझे कहीं दर्द भी महसूस नहीं हो रहा था और मैं बहुत डर गयी थी। मैं अपने दोस्त के साथ भाग कर अपने घर गयी और इस से पहले की मैं कुछ कहती, उसने मेरी माँ से कहा की मुझे चोट लग गयी।

मेरी माँ ने वो लाल धब्बा देखा और अचानक से मेरे दोस्त को घर से जाने के लिए कहा। उनका इतना रुखा बर्ताव देखकर मुझे बहुत शर्म आई। मेरे दोस्त को अचंबा भी हुआ और बुरा भी लगा। वो चला गया और मेरी माँ ने मुझे बाथरूम में जाकर उनका इंतज़ार करने को कहा।

फ़िर मेरी माँ मेरी एक पेंटी (अंडर वेअर) में सैनिटेरी पेड लगाकर लायी जो उन्होंने सेफ्टी पिन से लगाया था और उन्होंने मुझे वो पहनने के लिए कहा। मैं बहुत घबरायी हुई थी - मेरी पेंटी में बहुत सारा खून था और मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मेरी माँ को ये कोई बड़ी बात क्यूँ नहीं लग रही थी।

लड़के

मैं डगमगाते हुए उस तकलीफ़देह पेड को पहनकर बाथरूम के बाहर निकली।  और फ़िर मेरी माँ मुझसे 'वो ज़रूरी' बात करने बैठी। उन्होंने मुझसे कहा की यह एक बहुत ही  प्राकृतिक सी चीज़ है जो हर लड़की को होता है जब वो 'बड़ी' हो जाती हैं। माँ ने यह भी बताया की अब से इसी तरह, हर महीने 4 से 7 दिन तक मेरे शरीर से खून निकलेगा।

और फ़िर माँ और भी ज़रूरी बातों के बारे में बातचीत करने लगी। उनके हिसाब से, क्यूंकि अब मैं 'बड़ी' हो गयी थी, इसलिए मेरा अब लड़कों के साथ खेलना अच्छा नहीं था। क्यूंकि उन्हें लगता था की अगर हमारी दोस्ती 'ज़्यादा' बढ़ गयी तो शायद हम एक दूसरे को 'कुछ गलत' जगहों पर भी छू लें, और फ़िर हमारा बच्चा हो जायेगा!

अकेलापन और दुविधा

उस शाम मेरी माँ ने मेरे लिए चाय बनायीं और मुझे गरम पानी की बोतल भी दी, ये कहकर की अगर पेट में दर्द उठे तो उस बोतल से सेक कर लूँ। उसके बाद वो बहुत देर तक मुझसे इस बारे में बात करती रही की उन्होंने मेरे दोस्त को घर से जाने के लिए क्यूँ कहा। उन्होंने मुझे समझाया की अपने माहवारी/पीरियड्स की बात किसी से भी नहीं करनी है। 

उस रात मुझे लगा की मैं अचानक से बड़ी हो गयी, लेकिन मुझे बहुत अकेला और दुविधा भरा भी महसूस हुआ। मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे पास कोई बड़ा डरावना रहस्य है जिसे मैं किसी को भी नहीं बता सकती।"

ऊष्मा (उनका असली नाम नहीं है) 27 वर्षीया पत्रकार हैं जो बंगलोर (दक्षिण भारत) में रहती हैं।

फोटो: Flickr:欠我兩千塊

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